प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार सुबह केरल और तमिलनाडु में बड़ी छापेमारी की। ED Raid BLM Society से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई है। एजेंसी ने दोनों राज्यों में 11 ठिकानों पर तलाशी ली। इनमें कोच्चि, कोझिकोड और चेन्नई के ठिकाने शामिल हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई।
ED Raid BLM Society: किस पर है आरोप
यह जांच भरथ लजना मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (BLM) से जुड़ी है। इसके संस्थापक सदस्य आर प्रेमकुमार पर गंभीर आरोप हैं। प्रेमकुमार सोसाइटी के वास्तविक अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक बताए जाते हैं। आरोप है कि उन्होंने जनता की जमा राशि का गलत इस्तेमाल किया। करोड़ों रुपये की रकम पत्नी और रिश्तेदारों के खातों में भेजी गई। यह रकम निजी इस्तेमाल के लिए भेजी गई बताई जाती है।
सूत्रों के अनुसार कांचीपुरम में करीब 500 एकड़ जमीन भी जांच के दायरे में है। यह जमीन प्रेमकुमार की पत्नी के नाम पर होने का आरोप है। कुछ रिपोर्टों में इस पूरे मामले को 5,000 करोड़ रुपये का घोटाला बताया गया है। हालांकि अभी तक किसी भी आरोप की अदालत में पुष्टि नहीं हुई है। सभी आरोप जांच के स्तर पर हैं।
2006 में शुरू हुई थी BLM सोसाइटी
BLM सोसाइटी की शुरुआत 2006 में चेन्नई में हुई थी। यह एक आवास सहकारी सोसाइटी के रूप में शुरू हुई थी। आज इसकी करीब 150 शाखाएं बताई जाती हैं। सोसाइटी के 15 लाख से ज्यादा सदस्य हैं। इसके सदस्य केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में फैले हुए हैं।
सोसाइटी के चेन्नई के कोयंबेडु स्थित मुख्यालय पर भी छापा मारा गया। वानगरम और कोयंबटूर के ठिकाने भी तलाशी के दायरे में आए। ED की कोच्चि इकाई इस कार्रवाई को अंजाम दे रही है। छापेमारी बुधवार सुबह शुरू हुई और देर तक जारी रही।
प्रेमकुमार की गिरफ्तारी और पुरानी जांच
केरल क्राइम ब्रांच पहले से ही प्रेमकुमार के खिलाफ जांच कर रही है। क्राइम ब्रांच ने 29 अक्टूबर को उन्हें चेन्नई से गिरफ्तार किया था। उन्हें कोझिकोड की अदालत में पेश किया गया था। यह गिरफ्तारी BLM के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी की शिकायत पर हुई थी। शिकायत कोझिकोड के नडक्कावु थाने में दर्ज कराई गई थी।
शिकायत में प्रेमकुमार पर मारपीट का आरोप भी लगाया गया था। इसके बाद भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5) और 318(2) के तहत FIR दर्ज हुई। ये धाराएं आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी से जुड़ी हैं। ED अब इस मामले में धन के स्रोत और उसके इस्तेमाल का पता लगा रही है।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, ED की टीम दस्तावेज और डिजिटल सबूत जुटा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की सही तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल सोसाइटी के जमाकर्ताओं में इस कार्रवाई को लेकर चिंता बनी हुई है।
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