बोकारो कोयला ढेर हादसा गुरुवार तड़के झारखंड में हुआ। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की कथारा कोलियरी में कोयले का बड़ा ढेर अचानक ढह गया। हादसा बोकारो जिले के बेरमो अनुमंडल में स्टॉकयार्ड नंबर 5 पर हुआ। ढेर के नीचे सात लोग दब गए। इनमें छह महिलाएं और एक पुरुष शामिल थे। मौके पर ही तीन महिलाओं की जान चली गई। चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए। घायलों को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद उन्हें बोकारो के बड़े अस्पताल में भेजा गया।
बोकारो कोयला ढेर हादसा: घरेलू ईंधन के लिए कोयला बीन रही थीं महिलाएं
हादसे का शिकार हुए लोग पास की बांध बस्ती के रहने वाले थे। वे रोज की तरह बिखरा हुआ कोयला बीनने गए थे। घरों में खाना पकाने के लिए उन्हें यही कोयला काम आता था। Lokmat Times की रिपोर्ट के अनुसार ढेर अचानक गिरा और लोग उसके नीचे दब गए। कोई भी पीड़ित कोल इंडिया का कर्मचारी नहीं था। वे सभी आसपास के गांवों से आए थे। पुलिस ने बताया कि राहत दल ने मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकाला। तीन महिलाओं को मौके पर ही मृत पाया गया।
जांच में जुटी पुलिस और CCL प्रबंधन
बेरमो के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रवींद्र सिंह ने हादसे की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पुलिस और CCL प्रबंधन मिलकर जांच कर रहे हैं। ढेर गिरने का कारण अभी साफ नहीं हुआ है। अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि ढेर कमजोर क्यों हुआ। इसके साथ ही स्टॉकयार्ड की सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच हो रही है। घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टर उनकी निगरानी कर रहे हैं।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
कोयला बीनने के दौरान हादसे पहले भी हो चुके हैं। गरीब परिवारों के लोग बचे हुए कोयले पर निर्भर रहते हैं। इसलिए वे खतरनाक ढेरों के पास जाने को मजबूर होते हैं। चावड़ी बाजार इमारत हादसा भी ऐसा ही मामला था। वहां भी मलबे के नीचे लोग दब गए थे। Cyclone Murasu के बाद भी राहत दलों को मुश्किल हालात का सामना करना पड़ा था। विशेषज्ञों का कहना है कि कोयला क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम जरूरी हैं। प्रशासन ने हादसे की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
