गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने Supreme Court 24 Hour Rule पर बड़ा फैसला सुनाया। अब 24 घंटे की समय सीमा हिरासत के समय से गिनी जाएगी। यह सीमा मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के लिए है। यह समय औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज होने के समय से नहीं गिना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी और हिरासत के बीच कृत्रिम फर्क नहीं किया जा सकता। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 22(2) पर आधारित है।
Supreme Court 24 Hour Rule क्या कहता है
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल एस चंद्रचूड़ की पीठ ने यह फैसला दिया। मामला Sujit Das बनाम भारत संघ का था। चार लोगों को त्रिपुरा में 29 सितंबर 2025 को दोपहर 2 बजे हिरासत में लिया गया था। उनकी औपचारिक गिरफ्तारी अगले दिन सुबह 11 बजे दर्ज की गई। उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने शाम 4:45 बजे पेश किया गया। कोर्ट ने कहा कि 24 घंटे दोपहर 2 बजे से ही शुरू हो गए थे। इसलिए पेशी में देरी हुई थी।
NDPS मामले में क्या हुआ
चारों लोगों पर NDPS कानून के तहत मामला दर्ज था। उनसे 11.03 किलो याबा टैबलेट बरामद हुई थी। त्रिपुरा हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला पलट दिया। उसने चारों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होने पर NDPS की सख्त जमानत शर्तें भी राहत नहीं रोक सकतीं।
मजिस्ट्रेटों के लिए नए निर्देश
कोर्ट ने मजिस्ट्रेटों को भी साफ निर्देश दिए हैं। पेशी के समय मजिस्ट्रेट को हिरासत की असली तारीख और समय दर्ज करना होगा। अगर 24 घंटे की सीमा टूटती है तो व्यक्ति को तुरंत रिहा करना होगा। यात्रा के समय के अलावा कोई और समय नहीं घटाया जाएगा। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने कहा कि जांच के नाम पर समय बढ़ाना संविधान के खिलाफ है। कोर्ट ने ओडिशा, केरल और मद्रास हाई कोर्ट के पुराने फैसलों से असहमति जताई। कानूनी मामलों में Lavrov का फेक Video शेयर करने का आरोप भी चर्चा में रहा। संसद में Amit Shah ने Rahul Gandhi को बहस की चुनौती दी थी।
