चुनाव आयोग ने सात राज्यों में वोटर लिस्ट से हटाए गए 4.51 करोड़ मतदाताओं को राहत दी है। EC SIR Second Chance के तहत इन मतदाताओं को अब अपनी जानकारी दोबारा जमा करने का मौका मिलेगा। आयोग ने शुक्रवार को सातों राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र लिखा। इससे उन लोगों को फायदा होगा, जिनके नाम मसौदा सूची में नहीं आए।
Deccan Herald की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 4,51,76,997 मतदाताओं के नाम मसौदा सूची से हटाए गए थे। इनमें महाराष्ट्र के 2.06 करोड़ मतदाता सबसे ज्यादा हैं। इसके बाद तेलंगाना में 73.39 लाख नाम हटे। दिल्ली में 47.56 लाख, आंध्र प्रदेश में 44.89 लाख और झारखंड में 43.61 लाख नाम हटाए गए। हरियाणा में 33.83 लाख और नगालैंड में 1.57 लाख नाम हटे। इन सातों राज्यों की अंतिम वोटर लिस्ट अभी प्रकाशित नहीं हुई है।
EC SIR Second Chance: किसे मिलेगा फायदा
आयोग ने कहा कि ASDD श्रेणी के मतदाता अब आवेदन कर सकते हैं। इस श्रेणी में अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहराव वाले नाम आते हैं। जो मतदाता उसी पते पर रहते हैं, वे पहले से भरा हुआ गणना फॉर्म और एक बयान जमा करेंगे। बयान में यह बताना होगा कि वे पहले फॉर्म क्यों नहीं जमा कर सके। फॉर्म खुद या परिवार के किसी सदस्य के जरिए दिया जा सकता है।
जो मतदाता उसी राज्य में कहीं और चले गए हैं, उनके लिए भी राहत है। उन्हें फॉर्म 8 भरने की जरूरत नहीं होगी। वे गणना फॉर्म के साथ बयान और नए पते का प्रमाण देंगे। बयान में पुराना और नया पता, दोनों लिखने होंगे। जिन लोगों ने पहले ही फॉर्म 6 भर दिया है, उन्हें दोबारा फॉर्म भरने की जरूरत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद आया फैसला
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद आया है। अदालत ने 28 अक्टूबर को यह सवाल उठाया था। हटाए गए मतदाताओं से फॉर्म 6 भरने को क्यों कहा जा रहा है? याचिका अंजलि भारद्वाज और अमृता जौहरी ने दायर की थी। इस मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।
आयोग ने कहा कि सभी हटाए गए मतदाताओं के आंशिक भरे हुए फॉर्म ECINET पर फिर से तैयार किए जाएंगे। बूथ स्तर के अधिकारी घर-घर जाकर, व्हाट्सएप, ईमेल और एसएमएस के जरिए मतदाताओं से संपर्क करेंगे। इसलिए मतदाताओं को अपने दस्तावेज तैयार रखने चाहिए।
कांग्रेस ने इस फैसले को आयोग की यू-टर्न बताया है। पार्टी नेता जयराम रमेश ने कहा कि इससे गलत तरीके से नाम हटाए जाने की बात सामने आई है। वहीं, राहुल गांधी ने शुक्रवार को गृह मंत्री अमित शाह से एक मांग की। उन्होंने कहा कि शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को SIR पर खुली बहस के लिए राजी करें।
गौरतलब है कि यह फैसला छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विशेष सारांश पुनरीक्षण से अलग है। उस प्रक्रिया की अंतिम सूची 21 जनवरी 2027 को आएगी। इस बार का मौका सात अन्य राज्यों में SIR के तहत हटाए गए मतदाताओं के लिए है।
