Follow Dainik Rajeev Times

संसद में अमित शाह का बयान: नेहरू ने वंदे मातरम् को तोड़ा, इंदिरा ने जेल भेजा

DR Times
3 Min Read

नई दिल्ली: संसद में वंदे मातरम् पर चल रही बहस के दूसरे दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर जमकर हमला किया। राज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर जोर दिया और इसे भारतीय संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बताया।

अमित शाह ने कहा, “वंदे मातरम् जब बनी थी, आज़ादी के आंदोलन में थी, आज भी है और 2047 में जब महान भारत बनेगा तब भी रहेगी। इसकी पृष्ठभूमि में सदियों तक इस्लामिक आक्रमण झेलकर देश की संस्कृति को क्षीण करने और अंग्रेजों द्वारा थोपे गए नए ढांचे के विरोध का भाव था, जिसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने शब्दों में व्यक्त किया।” उन्होंने यह भी कहा कि मातृभूमि का वंदन प्रभु श्रीराम, आचार्य शंकर और चाणक्य जैसे महापुरुषों ने भी किया।

पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् की स्वर्ण जयंती पर नेहरू ने इसे दो टुकड़ों में बाँट दिया और यह तुष्टीकरण की शुरुआत थी। शाह ने कहा, “अगर वंदे मातरम् को दो टुकड़े कर तुष्टीकरण की शुरुआत नहीं हुई होती तो देश का विभाजन भी नहीं होता।”

अमित शाह ने इंदिरा गांधी पर भी आरोप लगाया कि वंदे मातरम् के 100 साल पूरे होने पर, आपातकाल के दौरान, जिन लोगों ने इसका गान किया उन्हें जेल में डाल दिया गया। उन्होंने कहा, “विपक्ष के लोग, सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में रखा गया, अखबारों पर ताले लगाए गए और पूरे देश को बंदी बनाकर रखा गया।”

गृह मंत्री ने कांग्रेस को संसद में घेरते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सदन में वंदे मातरम् का गान बंद कर दिया गया था। उन्होंने 1992 का उदाहरण देते हुए बताया कि भाजपा सांसद श्री राम नाईक ने वंदे मातरम् को फिर से गाने की पहल की, जिस पर नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने लोकसभा के स्पीकर से इसे सदन में गाने की अनुमति लेने की बात कही।

शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् केवल गीत नहीं बल्कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और मातृभूमि के प्रति निष्ठा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस सदन और देश के सभी नागरिकों को इसके महत्व को समझना चाहिए और इसे आदर के साथ मानना चाहिए।

अमित शाह का यह भाषण संसद में भारी चर्चा का विषय बन गया। विपक्षी सदस्यों ने इसे आक्रामक और विवादास्पद बताया, वहीं समर्थकों ने इसे भारतीय संस्कृति और गौरव की रक्षा के दृष्टिकोण से सराहा। यह बहस देश भर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गहन चर्चा का विषय बनी हुई है।

MORE NEWS>>खजराना गणेश मंदिर की दानपेटियों से पहले दिन निकले 64 लाख रुपये, कुल दानराशि दो करोड़ पार होने का अनुमान

Share This Article