नई दिल्ली: संसद में वंदे मातरम् पर चल रही बहस के दूसरे दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर जमकर हमला किया। राज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर जोर दिया और इसे भारतीय संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बताया।
अमित शाह ने कहा, “वंदे मातरम् जब बनी थी, आज़ादी के आंदोलन में थी, आज भी है और 2047 में जब महान भारत बनेगा तब भी रहेगी। इसकी पृष्ठभूमि में सदियों तक इस्लामिक आक्रमण झेलकर देश की संस्कृति को क्षीण करने और अंग्रेजों द्वारा थोपे गए नए ढांचे के विरोध का भाव था, जिसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने शब्दों में व्यक्त किया।” उन्होंने यह भी कहा कि मातृभूमि का वंदन प्रभु श्रीराम, आचार्य शंकर और चाणक्य जैसे महापुरुषों ने भी किया।
पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् की स्वर्ण जयंती पर नेहरू ने इसे दो टुकड़ों में बाँट दिया और यह तुष्टीकरण की शुरुआत थी। शाह ने कहा, “अगर वंदे मातरम् को दो टुकड़े कर तुष्टीकरण की शुरुआत नहीं हुई होती तो देश का विभाजन भी नहीं होता।”
#WATCH | Union Home Minister Amit Shah says, "Some members raised questions in the Lok Sabha on the need for these discussions on Vande Mataram. The need for discussion on Vande Mataram, the need for dedication towards Vande Mataram, was important back then; it is needed now, and… pic.twitter.com/BXJukCsnDT
— ANI (@ANI) December 9, 2025
अमित शाह ने इंदिरा गांधी पर भी आरोप लगाया कि वंदे मातरम् के 100 साल पूरे होने पर, आपातकाल के दौरान, जिन लोगों ने इसका गान किया उन्हें जेल में डाल दिया गया। उन्होंने कहा, “विपक्ष के लोग, सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में रखा गया, अखबारों पर ताले लगाए गए और पूरे देश को बंदी बनाकर रखा गया।”
#WATCH | Union Home Minister Amit Shah says, " When Vande Mataram was limited after it completed 50 years, that is when appeasement started. That appeasement led to the partition of the country. Had the Congress not divided Vande Mataram for appeasement, the country would not… pic.twitter.com/qbBxFQGaZ8
— ANI (@ANI) December 9, 2025
गृह मंत्री ने कांग्रेस को संसद में घेरते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सदन में वंदे मातरम् का गान बंद कर दिया गया था। उन्होंने 1992 का उदाहरण देते हुए बताया कि भाजपा सांसद श्री राम नाईक ने वंदे मातरम् को फिर से गाने की पहल की, जिस पर नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने लोकसभा के स्पीकर से इसे सदन में गाने की अनुमति लेने की बात कही।
#WATCH | Union Home Minister Amit Shah says, " When Vande Mataram was limited after it completed 50 years, that is when appeasement started. That appeasement led to the partition of the country. Had the Congress not divided Vande Mataram for appeasement, the country would not… pic.twitter.com/qbBxFQGaZ8
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शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् केवल गीत नहीं बल्कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और मातृभूमि के प्रति निष्ठा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस सदन और देश के सभी नागरिकों को इसके महत्व को समझना चाहिए और इसे आदर के साथ मानना चाहिए।
अमित शाह का यह भाषण संसद में भारी चर्चा का विषय बन गया। विपक्षी सदस्यों ने इसे आक्रामक और विवादास्पद बताया, वहीं समर्थकों ने इसे भारतीय संस्कृति और गौरव की रक्षा के दृष्टिकोण से सराहा। यह बहस देश भर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गहन चर्चा का विषय बनी हुई है।

