Artemis II Mission: 54 Saal Baad Insaan Phir Chand Ke Kareeb Pahunche
Artemis II Mission: 1972 Ke Baad Pehli Baar Chand Ke Kareeb Pahunche Insaan
Artemis II Mission ने अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। 1972 में Apollo-17 मिशन के बाद पहली बार इंसान चांद के करीब पहुंचेगा। नासा ने 2 अप्रैल को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से आर्टेमिस-II मिशन लॉन्च किया।
इस मिशन में 4 अंतरिक्ष यात्री Orion स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर धरती पर लौटेंगे। यह मिशन करीब 10 दिन का है। वहीं इसका मकसद भविष्य में चांद पर इंसानों की वापसी की तैयारी करना है।
Artemis II Mission क्यों है खास
Artemis II Mission इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि यह 54 साल बाद पहला crewed lunar mission है। इससे पहले 1972 में Apollo-17 मिशन के जरिए इंसान चांद के करीब पहुंचा था।
हालांकि यह मिशन चांद पर लैंड नहीं करेगा। इसके बजाय Orion स्पेसक्राफ्ट चांद के चारों ओर घूमकर वापस लौटेगा। इस दौरान स्पेसक्राफ्ट के life support system, navigation और communication सिस्टम की जांच की जाएगी।
- मिशन की अवधि 10 दिन है
- 4 अंतरिक्ष यात्री मिशन का हिस्सा हैं
- स्पेसक्राफ्ट चांद के चारों ओर घूमकर लौटेगा
यह मिशन भविष्य के Artemis-III और Artemis-IV मिशन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
4 अंतरिक्ष यात्रियों में कई ऐतिहासिक चेहरे
इस मिशन में NASA के 3 और कनाडा के 1 अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। मिशन कमांडर रीड वाइजमैन हैं। वहीं विक्टर ग्लोवर पायलट की भूमिका में हैं।
क्रिस्टीना कोच इस मिशन में शामिल होने वाली पहली महिला हैं जो चांद के करीब जाएंगी। दूसरी ओर विक्टर ग्लोवर चांद के करीब पहुंचने वाले पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री बनेंगे। कनाडा के जेरेमी हैनसन भी इस मिशन का हिस्सा हैं और वह चांद के करीब पहुंचने वाले पहले गैर-अमेरिकी बनेंगे।
- रीड वाइजमैन मिशन कमांडर हैं
- क्रिस्टीना कोच पहली महिला हैं जो चांद के करीब जाएंगी
- विक्टर ग्लोवर पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री होंगे
- जेरेमी हैनसन पहले गैर-अमेरिकी होंगे
यह मिशन diversity और global partnership का भी बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
लॉन्च से पहले आई तकनीकी दिक्कतें
लॉन्च से पहले Orion स्पेसक्राफ्ट और SLS रॉकेट में कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आई थीं। दरअसल launch abort system में समस्या आई थी। यह सिस्टम आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बनाया गया है।
हालांकि इंजीनियरों ने तेजी से समस्या को ठीक कर लिया। इसके बाद मिशन लॉन्च किया गया। लॉन्च के बाद कुछ समय के लिए Orion कैप्सूल का संपर्क भी टूटा था। वहीं कैप्सूल के टॉयलेट सिस्टम में भी दिक्कत आई थी, जिसे बाद में ठीक कर लिया गया।
Orion स्पेसक्राफ्ट Apollo से कितना अलग
Orion स्पेसक्राफ्ट पुराने Apollo कैप्सूल की तुलना में ज्यादा आधुनिक है। इसमें रहने के लिए ज्यादा जगह है। साथ ही इसमें आधुनिक टॉयलेट, सोलर पैनल, बड़ी खिड़कियां और बेहतर कंप्यूटर सिस्टम दिए गए हैं।
इसके अलावा Orion में astronauts के लिए exercise equipment भी मौजूद है। नासा इस मिशन के जरिए यह भी जांच करेगा कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में इंसान कितनी आसानी से रह सकते हैं।
- Orion में Apollo से 50% ज्यादा जगह है
- इसमें आधुनिक life support system है
- स्पेसक्राफ्ट में exercise और sleeping सुविधा भी है
यह जानकारी भविष्य में चांद और मंगल मिशन के लिए बेहद अहम होगी।
आगे क्या होगा
Artemis II Mission के बाद NASA Artemis-III और Artemis-IV मिशन पर काम करेगा। Artemis-III में चांद की सतह पर उतरने की तैयारी होगी। वहीं Artemis-IV के जरिए 2028 तक इंसानों को दोबारा चांद पर उतारने की योजना है।
स्रोत: NASA Artemis II Mission Details




