असम के धुबरी जिले में रविवार को बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान चला। धुबरी बेदखली में 640 से ज्यादा परिवारों के घर तोड़ दिए गए। करीब 4,000 लोग बेघर हो गए। प्रशासन ने आलमगंज पार्ट-IX गांव की 650 बीघा सरकारी जमीन खाली कराई।
अभियान सुबह छह बजे भारी पुलिस बल के साथ शुरू हुआ। करीब 50 से 60 बुलडोजर और जेसीबी मशीनें लगाई गईं। जिला आयुक्त दिबाकर नाथ खुद मौके पर मौजूद थे। पुलिस महानिरीक्षक अखिलेश कुमार सिंह भी अभियान की निगरानी कर रहे थे।
धुबरी बेदखली क्यों हुई
प्रशासन के मुताबिक यह जमीन सरकार की है। इस पर औद्योगिक पार्क बनाने की योजना है। विभाग दो साल से इस काम के लिए जमीन तलाश रहा था। लोगों को एक महीने पहले नोटिस देकर जगह खाली करने को कहा गया था।
जिला प्रशासन ने कहा कि 800 बीघा जमीन पर कब्जे का नोटिस दिया था। इनमें से 150 बीघा जमीन पर अदालत में मामला चल रहा है। इसलिए उस हिस्से पर कार्रवाई नहीं की गई। बाकी 650 बीघा जमीन रविवार को खाली कराई गई।
पहले ही जा चुके थे 80 फीसदी लोग
जिला आयुक्त के मुताबिक करीब 80 फीसदी लोग अभियान से पहले ही सामान लेकर जा चुके थे। कुछ परिवारों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर को होगी। सुनवाई के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।
कई परिवारों का कहना है कि उन्होंने निजी लोगों से जमीन खरीदी थी। उन्हें नहीं पता था कि यह सरकारी जमीन है। जिला आयुक्त ने कहा कि सरकारी जमीन की बिक्री गैरकानूनी है। उन्होंने शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।
आंसुओं और दुआओं के बीच टूटे घर
बेदखली के दौरान भावुक दृश्य देखने को मिले। मस्जिद में दुआएं पढ़ी गईं और कई लोग रोते दिखे। एक महिला अपना घर टूटता देखकर बेहोश हो गई। मजारों और कब्रिस्तानों पर भी कार्रवाई हुई। इससे इलाके में तनाव का माहौल रहा।
यह अभियान असम में अतिक्रमण हटाने के बड़े अभियान का हिस्सा है। पिछले दस साल में राज्य में करीब 19,000 परिवारों को सरकारी जमीन से हटाया जा चुका है। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई कानून के तहत की गई है। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का सवाल अब भी खुला है।
