देश में 17 BLO की मौत और बिहार में 80 लाख नाम हटाए; आप सांसद संजय सिंह बोले—यह सबसे बड़ा चुनावी घोटाला

DR Times
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भारत में चुनावी प्रक्रिया को लेकर इन दिनों बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर कई राज्यों से BLO (Booth Level Officer) के लगातार दबाव, असुरक्षित कार्य परिस्थितियों और मौत की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर बिहार में कथित रूप से 80 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का आरोप लगे हैं। इन दोनों मुद्दों को जोड़ते हुए आप सांसद संजय सिंह ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने इसे “देश का अब तक का सबसे बड़ा चुनावी घोटाला” बताया है।

संजय सिंह का कहना है कि BLO को जिस तरह खतरनाक और थकाने वाले हालात में काम कराया जा रहा है, वह अपनी प्रकृति में अमानवीय है। देशभर से अब तक 17 BLO की मौत की खबरें आ चुकी हैं—कभी सड़क हादसे में, कभी अत्यधिक काम के बोझ की वजह से, तो कभी सर्वे कार्य के दौरान अचानक हृदयगति रुकने से। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग और सरकार BLO की सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम की परिस्थितियों के प्रति गंभीर नहीं है।

इसी बीच बिहार से आए आंकड़े पूरे विवाद का केंद्र बन गए हैं। आरोप है कि राज्य में मतदाता सूची से करीब 80 लाख नाम हटाए गए हैं, और इसमें बड़ी संख्या में गरीब, मजदूर, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम शामिल हैं। विपक्ष का कहना है कि यह सुनियोजित तरीके से किया गया है ताकि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में परिणाम प्रभावित किए जा सकें।

आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि जिनके नाम हटाए गए, उनमें से ज्यादातर को यह सूचित भी नहीं किया गया कि उनका नाम मतदाता सूची से निकाला जा रहा है। जिन लोगों को BLO द्वारा सत्यापन के लिए नोटिस भेजा गया, वे भी शिकायत कर रहे हैं कि BLO उनके घर तक पहुंचे ही नहीं, फिर भी उनके दस्तावेजों को “नॉन–ट्रेसेबल” बताकर उन्हें लिस्ट से बाहर कर दिया गया।

उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर देश में मतदाता सूची में इतनी भारी गड़बड़ी हुई है, तो यह लोकतंत्र की नींव पर सीधा हमला है। उनके अनुसार,
“17 BLO की मौत और 80 लाख वोटर नाम हटना कोई सामान्य गलती नहीं है। यह संगठित तरीके से किया गया चुनावी घोटाला है। चुनाव आयोग को इसमें तुरंत जांच करनी चाहिए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई करनी चाहिए।”

इसी बीच चुनाव आयोग ने इन आरोपों को राजनीतिक बयान बताते हुए कहा है कि मतदाता सूचियों में संशोधन नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, और हर बदलाव कानून के तहत किया जाता है। आयोग का दावा है कि नाम हटाने की प्रक्रिया किसी राजनीतिक दबाव में नहीं होती, बल्कि होम–वेरिफिकेशन के आधार पर तय होती है।

सवाल यह है कि—

  • 17 BLO की मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा?

  • क्या 80 लाख लोगों को बिना जानकारी के वोट सूची से हटा दिया गया?

  • क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या वाकई चुनावी हेरफेर?

फिलहाल, विपक्ष और सरकार के बीच आरोप–प्रत्यारोप जारी हैं। यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राजनीतिक बहस का कारण बन चुका है।

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