शनिवार 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले राजधानी में तनाव बढ़ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दावा किया है कि देशभर में करीब 10,000 लोगों को हिरासत में लिया गया है। (टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट) पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने शुक्रवार को यह दावा किया। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकार युवाओं को डरा नहीं सकती। उन्होंने कहा कि वह शनिवार को दिल्ली पहुंचकर जंतर-मंतर तक मार्च करेंगे। पुणे से दिल्ली आ रहे छात्रों को मध्य प्रदेश के इटारसी में पुलिस ने हिरासत में लिया, जिसका वीडियो छात्र संगठन AISF के अध्यक्ष विराज देवांग ने जारी किया।
गुरुवार रात राजस्थान के अलवर में CJP के सह-प्रभारी दीपक बालियान को पुलिस ने उनके घर से हिरासत में लिया था। परिवार का आरोप है कि टूटी टांग के बावजूद पुलिस ने उनके साथ धक्का-मुक्की की। उन्हें देर रात छोड़ दिया गया। हालांकि पुलिस ने इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
अनुमति से इनकार की वजह
संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने बताया कि प्रदर्शन के लिए 10 दिन पहले की अनिवार्य सूचना नहीं दी गई थी। पिछली बार भी तय शर्तों का उल्लंघन हुआ था, इसलिए इस बार अनुमति नहीं दी जा सकती। नई दिल्ली इलाके में BNSS की धारा 163 लागू है, जिसके उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई होगी।
सुरक्षा के लिहाज से 221 CAPF कंपनियों के करीब 23,000 जवान तैनात किए गए हैं। दिल्ली की सीमाओं और संवेदनशील इलाकों को किले में तब्दील कर दिया गया है। नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन स्टेशनों पर शनिवार सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक आने वाली कई ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रदर्शन की अनुमति को लेकर दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले को 12 अक्टूबर तक टाल दिया, यानी प्रदर्शन की तारीख निकलने के बाद सुनवाई होगी।
CJP का प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर है। पार्टी का आरोप है कि मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है। शुक्रवार सुबह सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मेट्रो-ट्रेन की अंधाधुंध बंदी पर रोक लगा दी थी।
