दीपक पुनिया ने एशियाई खेल 2026 में भारत को 97 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज पदक दिलाया है। शनिवार को ब्रॉन्ज बाउट में उन्होंने मंगोलिया के गनखुयाग गनबतार को 2-1 से हराया। यह जीत बेहद खास है, क्योंकि 97 किलोग्राम वर्ग में भारत को 60 साल बाद कोई एशियाई खेलों का पदक मिला है। (ब्रॉन्ज बाउट की रिपोर्ट)
इससे पहले 1966 में भीम सिंह ने इस वजन वर्ग में भारत के लिए पदक जीता था। दीपक का यह दूसरा एशियाई खेलों का पदक है — उन्होंने हांगझोउ में 86 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर जीता था।
सेमीफाइनल की निराशा के बाद वापसी
दीपक का दिन मिश्रित रहा। उन्होंने पहले चीन के झोउ जूनपेंग को 12-2 से हराया, फिर हांगकांग के ली वुई फंग विंसेंट के खिलाफ वॉकओवर मिला। लेकिन सेमीफाइनल में उज्बेकिस्तान के शेरजोद पोयोनोव से 8-9 से हार गए। इस हार के बाद उन्होंने ब्रॉन्ज बाउट में शानदार वापसी की।
2-1 का स्कोर कड़ा मुकाबला बताता है, लेकिन दीपक ने आखिरी मिनट तक अपनी बढ़त बचाए रखी। कोचों का कहना है कि नए वजन वर्ग में ढलना आसान नहीं था, और यह पदक उनकी मेहनत का फल है।
आज भारत के लिए कुश्ती में शानदार दिन रहा। अमन सेहरावत का गोल्ड और अंतिम पंघाल का सिल्वर भारतीय कुश्ती की ताकत दिखाते हैं। सुजीत कालकल का गोल्ड भी इसी कड़ी का हिस्सा है। दीपक के ब्रॉन्ज के साथ भारतीय कुश्ती ने इन खेलों में अपनी ताकत एक बार फिर साबित कर दी है।
नया वजन, नई चुनौती
दीपक पुनिया पहले 86 किलोग्राम वर्ग में खेलते थे, जहां उन्होंने हांगझोउ एशियाई खेलों में सिल्वर जीता था। 97 किलोग्राम जैसे भारी वजन वर्ग में जाना हर पहलवान के लिए बड़ी चुनौती होती है। लेकिन दीपक ने मेहनत और अनुशासन से खुद को इस वजन के हिसाब से तैयार किया।
ब्रॉन्ज बाउट में उनका प्रदर्शन इस मेहनत का नतीजा था। मंगोलिया के गनबतार अनुभवी पहलवान हैं, लेकिन दीपक ने पूरे मैच में एकाग्रता नहीं खोई। 2-1 की जीत भले ही संकीर्ण दिखे, लेकिन यह उनके खेल की परिपक्वता दर्शाती है।
इस पदक के साथ दीपक पुनिया ने भारतीय कुश्ती के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है। 60 साल बाद 97 किलोग्राम वर्ग में एशियाई खेलों का पदक आना इस बात का सबूत है कि भारतीय पहलवान किसी भी वजन वर्ग में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ से टक्कर ले सकते हैं।
