नई दिल्ली। केंद्रीय निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने शनिवार को तीन FIR दर्ज कीं। ये मुकदमे संसद मार्ग और कनॉट प्लेस थानों में दर्ज हुए हैं। पुलिस का कहना है कि निषेधाज्ञा के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश की।
अधिकारियों के मुताबिक, FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत दर्ज की गई हैं। यह धारा लोक सेवक के वैध आदेश की अवज्ञा से जुड़ी है। कुछ रिपोर्टों में धारा 221, 132 और 3(5) का भी उल्लेख है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि FIR में किसी व्यक्ति या संगठन का नाम आरोपी के रूप में नहीं लिखा गया है। हालांकि, आह्वान करने वाले संगठनों का जिक्र जरूर किया गया है।
शनिवार को फिर जुटे प्रदर्शनकारी
शुक्रवार के प्रदर्शन के बाद शनिवार को भी आंदोलन जारी रहा। दोपहर करीब एक बजे AISA के कार्यकर्ता जंतर-मंतर के पास इकट्ठा होने लगे। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा और अविक साहा भी मार्च में शामिल हुए। स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने भी प्रदर्शन में शामिल होने की घोषणा की।
पुलिस ने एक नोटिस में कहा कि नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू है। इसके तहत बिना अनुमति के सार्वजनिक सभाओं, प्रदर्शनों और नारेबाजी पर रोक है। पुलिस ने साफ किया कि 3 अक्टूबर के लिए किसी प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है। इसके बावजूद जुटने वालों को पुलिस ने हिरासत में लेना शुरू कर दिया।
शुक्रवार को करीब 1,000 लोग हिरासत में
शुक्रवार (2 अक्टूबर) को गांधी जयंती के दिन AISA, SFI, DYFI, IYC, NSUI और विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं ने CEC के खिलाफ प्रदर्शन किया था। पुलिस ने करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। उस दिन शुक्रवार के प्रदर्शन और मेट्रो बंद के कारण मध्य दिल्ली के 11 स्टेशनों के गेट बंद किए गए थे और इलाके में मोबाइल इंटरनेट भी रोका गया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में भारी गड़बड़ियां हुई हैं। उनका दावा है कि दिल्ली में SIR के दौरान 47 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए और 33 लाख लोगों को नोटिस भेजे गए। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इसे ‘करो या मरो की लड़ाई’ बताया है। हालांकि कांग्रेस के अलावा AAP, RJD और CPI के नेता भी हिरासत में लिए गए थे।
चुनाव आयोग ने आरोप खारिज किए
चुनाव आयोग ने सभी आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम मसौदा सूची में नहीं हैं, वे दस्तावेज देकर नए सिरे से पंजीकरण करा सकते हैं। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी।
