पंजाब के गुरदासपुर जिले में गुरुवार रात कथित ड्रग बिक्री का विरोध करने पर तीन लोगों पर तेज हथियारों से हमला कर दिया गया। हमले में 40 वर्षीय बिक्रमजीत सिंह की मौत हो गई, जबकि निशान सिंह और गुरमुख सिंह गंभीर रूप से घायल हैं। घटना श्री हरगोबिंदपुर साहिब विधानसभा क्षेत्र के मारी पन्नवां गांव की है, जो बटाला पुलिस जिले में पड़ता है।
आरोप: ड्रग बिक्री का विरोध पड़ा महंगा
घायल गुरमुख सिंह और गांव के अन्य लोगों का आरोप है कि कुछ युवक नियमित रूप से गली में इकट्ठा होते थे, महिलाओं के गुजरने में दिक्कत होती थी और वे खुलेआम नशा बेचते थे। गुरुवार रात करीब 8 बजे जब तीनों ने इसका विरोध किया, तो 10 से 15 लोगों के समूह ने उन पर तेज हथियारों से हमला कर दिया। गांव के सरपंच सुरिंदरपाल सिंह बाजवा के मुताबिक, तीनों ने विरोध के तुरंत बाद समूह का सामना किया था।
स्थानीय लोगों ने तीनों को भाम के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां चिकित्सक डॉ. अभिषेक ने बताया कि बिक्रमजीत सिंह ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जबकि निशान और गुरमुख की हालत गंभीर बनी हुई है।
पुलिस का दावा: मोबाइल फोन को लेकर विवाद
हालांकि, पुलिस और मृतक के भाई का बयान आरोपों से अलग है। बिक्रमजीत के भाई रणजीत सिंह ने कहा कि यह विवाद जगरोप सिंह नाम के एक युवक के मोबाइल फोन को लेकर हुआ था — फोन कथित तौर पर प्रिंस नाम के एक अन्य युवक के पास था, और जब बिक्रमजीत ने उसे वापस करने को कहा तो बहस छिड़ गई। रणजीत सिंह ने ड्रग से संबंध होने से साफ इनकार किया है।
पुलिस ने 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। श्री हरगोबिंदपुर थाने के SHO सुखजिंदर सिंह मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। एक अधिकारी ने कहा कि ड्रग तस्करी के आरोपों की जांच जारी है और हमलावरों का पता लगाया जा रहा है।
यह घटना मानसा में एंटी-ड्रग कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के कुछ ही दिनों बाद हुई है। मेडिकल स्टोर के मालिक पर गोली मारने का आरोप है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। दो घटनाओं के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार के ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। भाजपा नेता परमिंदर सिंह बराड़ और कांग्रेस नेता परगट सिंह ने सरकार पर निशाना साधा है। पुलिस का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
सूत्र: NDTV
