ग्वालियर। Gwalior Trafficking मामले में रेलवे पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। ग्वालियर GRP ने एक कथित अंतरराष्ट्रीय मानव-तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में दो रोहिंग्या संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अलीगढ़ के एक किराए के मकान से चार लड़कियों और महिलाओं को बचाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए GRP अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को पत्र लिखकर व्यापक जांच की मांग करने वाली है।
पुलिस के मुताबिक पूरी कार्रवाई एक गुप्त सूचना पर हुई। खबर थी कि स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस (12643, निजामुद्दीन जाने वाली) में कुछ विदेशी नागरिक सफर कर रहे हैं। सूचना मिलते ही GRP प्रभारी दीप शिखा सिंह तोमर के नेतृत्व में टीम ने ग्वालियर स्टेशन पर ट्रेन रोक दी। जांच के दौरान जनरल कोच से 25 वर्षीय मुबीन को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में उसने अलीगढ़ में बैठे मोहम्मद हसन (35) का नाम उगला।
इसके बाद पुलिस अलीगढ़ पहुंची, जहां किराए के एक मकान से चार लड़कियां और महिलाएं बरामद की गईं। इनमें दो नाबालिग और दो वयस्क हैं। पुलिस के मुताबिक ये सभी म्यांमार मूल की रोहिंग्या हैं, जो बांग्लादेश के कॉक्स बाजार स्थित शरणार्थी शिविरों में रह रही थीं। GRP SP अंकित जैसवाल ने दोनों आरोपियों की पहचान की पुष्टि की है। जांच में सामने आया कि दोनों पहले बांग्लादेश गए और फिर अवैध रास्तों से भारत में घुसे। उनके पास आधार कार्ड नहीं था; वे UNHCR के शरणार्थी कार्ड का इस्तेमाल करते थे।
Gwalior Trafficking: लड़कियों को जम्मू ले जाने की साजिश
पुलिस का कहना है कि आरोपियों की योजना इन लड़कियों को जम्मू-कश्मीर में आयोजित शादियों के नाम पर ले जाने की थी। आरोपियों के मुताबिक जम्मू निवासी “आदिल” नाम के एक व्यक्ति को हर महिला के बदले 15 से 20 हजार रुपये दिए जाने थे। हालांकि यह दावा अभी जांच के दायरे में है और पुलिस इसे आरोपियों के बयान के तौर पर देख रही है।
जांच में यह भी पता चला कि लड़कियों को नदी और पहाड़ी रास्तों से बांग्लादेश की सीमा पार कराई गई थी। उन्हें हिंदी नहीं आती थी, इसलिए पुलिस ने पहले गूगल ट्रांसलेट की मदद ली और बाद में एक द्विभाषी दुभाषिया बुलाया। मुख्य आरोपी हसन पिछले करीब चार साल से हैदराबाद में रह रहा था, जहां उसकी पत्नी और बच्चे हैं। इसके अलावा बांग्लादेश में भी उसका परिवार — पत्नी और दो बच्चे — रहते हैं।
बचाई गई लड़कियों की वापसी के लिए अब बांग्लादेश दूतावास से संपर्क किया जाएगा। साथ ही इस नेटवर्क से जुड़ी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा की जा रही है। बांग्लादेशी नागरिकों की वापसी से जुड़ी कार्रवाई पर हमारी नजर बनी हुई है। फ्री प्रेस जर्नल के मुताबिक NIA जांच की मांग जल्द औपचारिक होगी।
