रीवा सांसद ने IAS संतोष वर्मा के प्रमोशन पर उठाए सवाल, SC-ST होने का आरोप, करणी सेना ने जताई कड़ी आपत्ति

DR Times
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मध्य प्रदेश में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के प्रमोशन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विवाद खड़ा हो गया है। रीवा से सांसद जनार्दन मिश्रा ने वर्मा के प्रमोशन पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग रखी है। सांसद ने आरोप लगाया कि संतोष वर्मा को उनके पदोन्नति में SC-ST आरक्षण का अनुचित लाभ मिला है, जबकि उनके इस वर्ग से होने पर विवाद है।

संतोष वर्मा मध्य प्रदेश कैडर के अनुभवी अधिकारी हैं और प्रशासनिक सेवाओं में लंबा करियर रही है। उनके कार्यकाल और निर्णयों पर हमेशा से निगाह रहती रही है। लेकिन इस बार प्रमोशन को लेकर उठे सवाल ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। सांसद मिश्रा ने कहा कि प्रमोशन प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और यदि किसी को अनुचित लाभ मिला है तो इसकी जांच होनी जरूरी है।

इसी बीच, विवाद ने सामाजिक संगठनों को भी सक्रिय कर दिया। युवा क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष ओकेंद्र राणा ने संतोष वर्मा के कथित विवादित बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। राणा ने कहा कि ऐसे अधिकारी समाज में गलत संदेश देते हैं और उनका प्रमोशन स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने तीखी चेतावनी देते हुए कहा, “यदि ऐसे लोग प्रशासनिक पदों पर बने रहते हैं तो हमें आम जनता के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाना होगा।”

करणी सेना के इस बयान के बाद प्रदेश प्रशासन और IAS संघ में भी हलचल बढ़ गई है। अधिकारियों का कहना है कि विवादित आरोपों का जवाब देना जरूरी है, ताकि प्रशासनिक प्रणाली की इमेज और विश्वास दोनों सुरक्षित रहे।

संतोष वर्मा के प्रमोशन पर उठे विवाद ने राज्य सरकार की भी नींद उड़ा दी है। सरकार अब इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने पर विचार कर रही है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जांच का उद्देश्य केवल प्रमोशन प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना है और किसी भी तरह का दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप इसे प्रभावित नहीं करेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस विवाद से आगामी विधानसभा चुनावों और सामाजिक संगठन के दखल की राजनीति पर भी असर पड़ सकता है। SC-ST वर्ग और अन्य पिछड़े वर्गों के नेताओं की निगाह इस मामले पर लगी हुई है। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

संतोष वर्मा के समर्थकों का कहना है कि अधिकारी की योग्यता और अनुभव उसके प्रमोशन का आधार है। वहीं, विरोधियों का दावा है कि जातिगत आरक्षण और व्यक्तिगत प्रभाव का गलत इस्तेमाल हुआ है। इस बहस ने प्रशासनिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चाओं को हवा दे दी है।

अब सवाल यह है कि मध्य प्रदेश प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व इस विवाद को किस तरह संभालेंगे। जांच रिपोर्ट और संसद में उठे सवाल इस मामले के अगले कदम तय करेंगे। जबकि करणी सेना और अन्य सामाजिक संगठन इस मुद्दे पर सतर्क बने हुए हैं, और आगामी दिनों में इसमें और तीखी बहस होने की संभावना है।

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