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दूषित पानी से 8 मौतों के बाद जागा प्रशासन: इंदौर के भागीरथपुरा में 4 महीने से दबी नई पाइपलाइन फाइल को मिली मंजूरी

इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर की छवि को उस वक्त गहरा झटका लगा, जब भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की सप्लाई से हालात बेकाबू हो गए। गंदा पानी पीने से अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग बीमार हो चुके हैं। इस गंभीर स्थिति के बाद अब जाकर प्रशासन एक्शन मोड में दिखाई दे रहा है।

दूषित पानी ने छीनी जिंदगियां, बीमारी ने बढ़ाई दहशत

भागीरथपुरा इलाके में पिछले कुछ दिनों से उल्टी-दस्त और तेज बुखार के मामले तेजी से सामने आए। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, गंभीर गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन मौतों की मुख्य वजह बने। हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक बच्चे की रिपोर्ट में हैजा (Cholera) की पुष्टि भी हुई है, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।

4 महीने की लापरवाही, अब जाकर खुली सिस्टम की आंख

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इंदौर नगर निगम के पास नई पाइपलाइन डालने की फाइल पिछले चार महीनों से लंबित थी। अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया के पास यह टेंडर रुका हुआ था। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते निर्णय लिया जाता, तो शायद आज यह जानलेवा स्थिति पैदा नहीं होती।

मौतों के बाद मिली मंजूरी, टेंडर को हरी झंडी

दूषित पानी से हुई मौतों और मीडिया में मामले के तूल पकड़ने के बाद नगर निगम ने आखिरकार नई पाइपलाइन के टेंडर को मंजूरी दे दी है। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए त्वरित रूप से लिया गया है।

2.5 करोड़ का प्रोजेक्ट, अगले हफ्ते से शुरू होगा काम

मंजूरी मिलने के बाद भागीरथपुरा में करीब 2 किलोमीटर लंबी नई वाटर सप्लाई पाइपलाइन डाली जाएगी।

  • कुल बजट: 2.5 करोड़ रुपये

  • समय सीमा: कम से कम 1 महीने में काम पूरा होने की संभावना

अधिकारियों के अनुसार, नई लाइन बिछने के बाद क्षेत्र को स्थायी समाधान मिलेगा।

लीकेज सुधरा, अब पानी की गुणवत्ता पर नजर

जांच में यह सामने आया कि सार्वजनिक शौचालय के नीचे मौजूद लीकेज के कारण पीने के पानी में गंदगी मिल रही थी। इस लीकेज को सुधारने का काम पूरा कर लिया गया है।

  • गुरुवार को फिर होगी पानी की जांच

  • विस्तृत लैब रिपोर्ट का इंतजार, जिससे संक्रमण की पुष्टि होगी

प्रशासन की अपील: उबालकर पिएं पानी

जब तक नई पाइपलाइन का काम पूरा नहीं हो जाता, प्रशासन ने लोगों से पानी उबालकर पीने और टैंकर के पानी पर निर्भर रहने की अपील की है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार इलाके में निगरानी कर रही हैं।

स्वच्छता के दावे पर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि स्वच्छता रैंकिंग और जमीनी हकीकत में कितना फर्क है। भागीरथपुरा की त्रासदी प्रशासनिक लापरवाही की बड़ी कीमत बनकर सामने आई है।

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