मुंबई। बॉलीवुड की चर्चित आइटम गर्ल और फिटनेस आइकन मलाइका अरोड़ा ने एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर खुलकर बात की है। साल 1998 में अभिनेता अरबाज खान से शादी करने वाली मलाइका ने 19 साल बाद इस रिश्ते को खत्म कर दिया था। उनका तलाक उस दौर में काफी चर्चा में रहा और अब एक बार फिर मलाइका ने इस फैसले पर अपनी बेबाक राय रखी है।
तलाक के फैसले पर परिवार और दोस्तों ने उठाए सवाल
इंडिया टुडे को दिए हालिया इंटरव्यू में मलाइका अरोड़ा ने बताया कि तलाक के बाद उन्हें सिर्फ पब्लिक ही नहीं, बल्कि अपने करीबी दोस्तों और परिवार तक से जजमेंट का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा,
“मुझे न सिर्फ पब्लिक ने बल्कि अपने दोस्तों और परिवार ने भी बहुत जज किया। मेरे हर फैसले पर सवाल उठाए गए, लेकिन फिर भी मैं अपने फैसले पर अडिग रही।”
“मुझे अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं”
मलाइका ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। उस समय उन्हें नहीं पता था कि भविष्य में उनकी जिंदगी कैसी होगी, लेकिन इतना जरूर पता था कि यह कदम उनके लिए जरूरी है।
उन्होंने कहा,
“मुझे नहीं पता था आगे क्या होगा, लेकिन मुझे यह पता था कि मुझे खुश रहना है। यही मेरे लिए सबसे जरूरी था।”
“अकेले रहकर भी मैं खुश थी”
एक्ट्रेस ने समाज की सोच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कई लोगों को यह समझ नहीं आया कि वह अपनी खुशी को प्राथमिकता कैसे दे सकती हैं।
मलाइका ने कहा,
“लोग कहते थे कि तुम अपनी खुशी को सबसे पहले कैसे रख सकती हो? लेकिन सच ये है कि मैं अकेले रहकर खुश थी और यही मेरे लिए सबसे अहम था।”
शादी की तलाश में नहीं हैं मलाइका
मलाइका अरोड़ा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह शादी की संस्था में विश्वास रखती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शादी हर किसी के लिए जरूरी हो।
उन्होंने कहा,
“मैं शादी में विश्वास करती हूं, लेकिन मैं इसकी तलाश में नहीं हूं। मेरी शादी हो चुकी है, मैं उससे आगे बढ़ चुकी हूं और मैं अपनी जिंदगी से संतुष्ट हूं।”
प्यार को लेकर अब भी खुला है दिल
मलाइका ने प्यार को लेकर बेहद सकारात्मक सोच दिखाई। उन्होंने कहा कि उन्हें प्यार देना और प्यार पाना अच्छा लगता है।
“अगर कोई खूबसूरत रिश्ता मेरी जिंदगी में आता है, तो मैं उसे पूरी तरह स्वीकार करूंगी। लेकिन मैं इसके पीछे भाग नहीं रही हूं।”
एक मजबूत और आत्मनिर्भर महिला की पहचान
मलाइका अरोड़ा की यह बातचीत उन महिलाओं के लिए एक संदेश है, जो समाज के डर से अपने फैसले नहीं ले पातीं। उन्होंने साबित किया कि खुद की खुशी को चुनना गलत नहीं है, भले ही उसके लिए आलोचना क्यों न झेलनी पड़े।

