Indore Jatigat Janaganana: रागिनी नायक ने सरकार पर साधा निशाना

Dainik R Times
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Indore Jatigat Janaganana

इंदौर में कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक ने जातिगत जनगणना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जातिगत गणना को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। साथ ही उन्होंने गणना की प्रक्रिया को पारदर्शी और स्पष्ट बनाने की मांग की।

रागिनी नायक ने कहा कि जातिगत आंकड़ों की सही तस्वीर सामने आना जरूरी है। उनके मुताबिक, इसके आधार पर सामाजिक प्रतिनिधित्व और नीतियों की बेहतर योजना बनाई जा सकती है।

हालांकि, आधिकारिक स्थिति यह है कि केंद्र सरकार ने Census 2027 में जातिगत गणना को शामिल करने का फैसला पहले ही कर लिया है। इसलिए मौजूदा विवाद गणना होगी या नहीं, इससे ज्यादा उसकी प्रक्रिया और स्वरूप को लेकर है।

Indore Jatigat Janaganana में रागिनी नायक ने क्या कहा?

सबसे पहले, रागिनी नायक ने कांग्रेस की मांगों को सामने रखा। उन्होंने जातिगत गणना में स्पष्ट और प्रमाणित श्रेणियां शामिल करने की बात कही।

कांग्रेस की मांग है कि लोगों की सामाजिक श्रेणी दर्ज करने की प्रक्रिया स्पष्ट हो। इसमें SC, ST, OBC और General जैसी श्रेणियों को लेकर स्पष्टता की बात कही गई।

वहीं, रागिनी नायक ने जातिगत जनगणना के मुद्दे को सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रही है।

Indore Jatigat Janaganana: 2019 से 2025 तक क्या हुआ?

इसके बाद, कांग्रेस ने जातिगत जनगणना को लेकर केंद्र के पुराने रुख का भी जिक्र किया। Census 2021 की तैयारी 2019 में शुरू हुई थी, लेकिन इसमें सामान्य जातियों की अलग-अलग गणना शामिल नहीं थी।

2021 में केंद्र सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग की अलग जातिगत गणना को लेकर व्यवहारिक और प्रशासनिक कठिनाइयों का रुख रखा था। बाद में जातिगत गणना का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में लगातार प्रमुख बना रहा।

फिर 30 अप्रैल 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की राजनीतिक मामलों की समिति ने Census 2027 में जातिगत गणना शामिल करने का निर्णय लिया। केंद्र सरकार के अनुसार, यह गणना जनगणना के दूसरे चरण में की जाएगी।

Census 2027 में जातिगत गणना की क्या स्थिति है?

सरकार ने Census 2027 को दो चरणों में कराने की योजना बनाई है। पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग Census का है।

इसके बाद, Population Enumeration का दूसरा चरण फरवरी 2027 में प्रस्तावित है। इसी चरण में जातियों की गणना भी की जाएगी।

साथ ही, केंद्र सरकार ने Census 2027 के लिए ₹11,718.24 करोड़ के कुल बजट को मंजूरी दी है। यह राशि केवल जातिगत गणना के लिए नहीं, बल्कि पूरी जनगणना प्रक्रिया के लिए है।

₹575 करोड़ को लेकर क्या है विवाद?

कांग्रेस नेताओं ने 2025-26 के दौरान ₹575 करोड़ के आवंटन को लेकर भी सवाल उठाए थे। यह राशि Registrar General of India के लिए आवंटित की गई थी, जो जनगणना की जिम्मेदारी संभालता है।

हालांकि, ₹575 करोड़ को Census 2027 का पूरा बजट बताना सही नहीं होगा। बाद में केंद्र सरकार ने Census 2027 के लिए कुल ₹11,718.24 करोड़ की मंजूरी दी।

इसलिए दोनों आंकड़ों को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।

Indore Jatigat Janaganana पर कांग्रेस की मुख्य मांग

इसके अलावा, कांग्रेस जातिगत गणना की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रही है। पार्टी चाहती है कि लोगों की जातिगत पहचान दर्ज करने का तरीका स्पष्ट और प्रमाणिक हो।

रागिनी नायक ने इसी संदर्भ में सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सही आंकड़े सामने आने से सामाजिक और आर्थिक नीतियां अधिक प्रभावी तरीके से बनाई जा सकती हैं।

वहीं, केंद्र सरकार की मौजूदा आधिकारिक स्थिति जातिगत गणना को Census 2027 का हिस्सा बनाने की है। गृह मंत्रालय ने फरवरी 2026 में भी स्पष्ट किया था कि जाति से जुड़े सवाल Population Enumeration के दूसरे चरण में शामिल होंगे।

Census 2027 पूरी तरह डिजिटल होगी

साथ ही, Census 2027 भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी। सरकार के अनुसार, गणनाकर्मी मोबाइल ऐप के जरिए डेटा दर्ज करेंगे।

Self-enumeration की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा, Census Management and Monitoring System के जरिए प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी।

इस पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण चरण Population Enumeration होगा। इसी दौरान जातिगत जानकारी भी दर्ज की जानी है।

फिलहाल, कांग्रेस प्रक्रिया की पारदर्शिता और स्वरूप पर सवाल उठा रही है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि जातिगत गणना Census 2027 में आधिकारिक रूप से शामिल है।

निष्कर्ष: इंदौर में रागिनी नायक का बयान जातिगत जनगणना को लेकर चल रही राजनीतिक बहस का हिस्सा है। तथ्यात्मक रूप से Census 2027 में जातिगत गणना का फैसला हो चुका है। अब बहस इसकी प्रक्रिया, प्रश्नावली और आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर है।

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