इंदौर में संभावित जलसंकट की तैयारी के लिए गुरुवार को बुलाई गई एक महत्वपूर्ण बैठक से शहर के 9 में से 5 विधायक नदारद रहे। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सिटी बस ऑफिस में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की यह बैठक कमजोर मानसून के बाद पानी की उपलब्धता की समीक्षा के लिए बुलाई थी। बैठक का मकसद मौजूदा पानी की स्थिति का जायजा लेना और संभावित संकट से निपटने की कार्ययोजना बनाना था।
बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव के साथ केवल 3 विधायक — मधु वर्मा, महेंद्र हार्डिया और रमेश मेंदोला — ही पहुंचे। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट भी कैबिनेट बैठक के चलते भोपाल में होने की वजह से शामिल नहीं हो सके। विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन और UDA आयुक्त संकेत भोंडवे बैठक में मौजूद रहे।
अनुपस्थित विधायकों में देपालपुर के मनोज पटेल, इंदौर-4 की विधायक और पूर्व महापौर मालिनी गौड़ तथा इंदौर-3 के विधायक गोलू शुक्ला शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक गोलू शुक्ला नवरात्रि पूजन में व्यस्त होने के कारण अपना प्रतिनिधि भेज चुके थे, जबकि मनोज पटेल और मालिनी गौड़ के मंत्री विजयवर्गीय से राजनीतिक मतभेद जगजाहिर हैं।
बैठक के बाद मीडिया ने जब विजयवर्गीय से विधायकों की गैरहाजिरी पर सवाल किया, तो पहले उन्होंने खीझ में कहा, “जो नहीं आए, उनसे पूछिए ना, मुझसे क्यों पूछ रहे हो… त्योहार भी हैं।” फिर चुटकी लेते हुए जोड़ा, “शायद उनके यहां पानी की समस्या न होगी।”
पटवारी का हमला, आंकड़ों में जलसंकट
कांग्रेस ने इस नदारदगी को तुरंत लपक लिया। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, “देश का पहला वाटर प्लस शहर, यानी हमारा इंदौर, ऐतिहासिक जलसंकट की दहलीज पर है! लेकिन आपके वोटों पर इतराने वाले इंदौर के विधायक बेपरवाह हैं।”
बैठक में पेश आंकड़ों के मुताबिक इस साल इंदौर में सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है। शहर को सालाना 38-40 इंच बारिश मिलती है, लेकिन इस बार अब तक सिर्फ 23.20 इंच दर्ज हुई है। बारिश की कमी से झीलों और जलाशयों का भराव प्रभावित हुआ है और भूजल स्तर को लेकर चिंता बढ़ गई है।
महापौर भार्गव ने शहर के जल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार से 50 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग दोहराई है। विजयवर्गीय ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्थिति बिगड़ने का इंतजार किए बिना अभी से तैयारियां शुरू की जाएं। उन्होंने कहा कि फंड कोई बाधा नहीं होगा और जल संरक्षण को लेकर जन-जागरूकता पर जोर दिया जाएगा।
आने वाले महीनों की चुनौती
मंत्री ने आगाह किया कि कई इलाकों में पहले से ही बोरवेल से जुड़ी शिकायतें आने लगी हैं और शहर के कई हिस्सों को नर्मदा का पानी नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में बोरवेल सूख सकते हैं, इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी है। बैठक में जलाशयों की भंडारण क्षमता बढ़ाने और वैकल्पिक आपूर्ति के विकल्पों पर भी चर्चा हुई।
