मासूमों की जान और सिस्टम का भ्रष्टाचार: जेपी नड्डा के दौरे पर जीतू पटवारी ने प्रदेश सरकार को घेरा

DR Times
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के मध्य प्रदेश दौरे को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस मौके पर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सीधे तौर पर “आपातकाल जैसी स्थिति” करार देते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

जीतू पटवारी ने सवाल उठाया कि प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के लिए आवंटित 23,570 करोड़ रुपये का विशाल बजट आखिर जा कहां रहा है। उन्होंने कहा कि अगर इतना बड़ा बजट मौजूद है, तो फिर सरकारी अस्पतालों में मासूम बच्चों की जान क्यों जा रही है।

पटवारी ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कभी जहरीली दवाओं से बच्चों की मौत हो रही है, तो कहीं आईसीयू में आग लगने से मासूम जिंदा जल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ अस्पतालों में बच्चों को चूहे और कुत्ते कुतर रहे हैं, तो कहीं एचआईवी संक्रमित खून तक चढ़ाया जा रहा है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता और भ्रष्टाचार का खुला प्रमाण है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है। उन्होंने सवाल किया कि जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री पहले भी मध्य प्रदेश आए थे, तब इन घटनाओं पर उनकी चुप्पी क्यों रही। क्या यह चुप्पी सिर्फ अनदेखी है या फिर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का तरीका?

जीतू पटवारी ने कहा कि सरकार बड़े-बड़े दावे जरूर करती है, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद डरावनी है। सरकारी अस्पतालों में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं, न दवाइयां और न ही सुरक्षा के इंतजाम। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग में ठेके और खरीदी के नाम पर बड़े स्तर पर घोटाले हो रहे हैं, जिनका खामियाजा सीधे तौर पर आम जनता और मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।

पटवारी ने यह भी कहा कि अगर सरकार सच में जनता की भलाई चाहती है, तो सबसे पहले इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों व नेताओं पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर चुप नहीं बैठेगी और सड़क से लेकर सदन तक सरकार को घेरती रहेगी।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के दौरे के दौरान उठे ये सवाल प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर बहस को जन्म दे रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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