मंडला/बालाघाट। मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में वन्यजीवन संरक्षण की दिशा में रविवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कान्हा के सूपखार रेंज में आठ जंगली भैंसों को 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में छोड़ा। ये Kanha wild buffalo असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए गए थे और क्वारंटाइन अवधि पूरी करने के बाद इन्हें एक हेक्टेयर के छोटे बाड़े से बड़े बाड़े में शिफ्ट किया गया।
इन आठ भैंसों में छह मादाएं और दो नर हैं। इन्हें दो चरणों में कान्हा लाया गया था — 28 अप्रैल और 9 मई को। असम से मध्यप्रदेश तक करीब 2,200 किलोमीटर की दूरी विशेष वाहनों में तय की गई, जिसमें वन्यजीव चिकित्सकों की टीम ने लगातार निगरानी रखी। इस पूरी प्रक्रिया में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सहयोग दिया, जिनका मुख्यमंत्री यादव ने आभार भी जताया।
Kanha wild buffalo: करीब 100 साल बाद वापसी
मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि जंगली भैंसे करीब 100 साल पहले मध्यप्रदेश के जंगलों से गायब हो गए थे। वन विभाग ने सूपखार क्षेत्र का चुनाव इसलिए किया, क्योंकि यहां अतीत में इनकी मौजूदगी के सबूत मिले हैं। छोटे बाड़े में रखकर भैंसों को स्थानीय जलवायु और माहौल में ढालने में मदद मिली, और अब ये बड़े बाड़े में पूरी तरह व्यवस्थित हो रहे हैं।
राज्य सरकार का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में 50 जंगली भैंसों को कान्हा में बसाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून के मौसम के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ने की दिशा में काम होगा। जानकारों के मुताबिक जंगली भैंसों की वापसी से कान्हा के घास के मैदानों का प्रबंधन बेहतर होगा और जैव विविधता को बल मिलेगा।
चीता आवास पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अन्य वन्य प्रजातियों की बहाली पर भी काम कर रही है। 7 अक्टूबर को नौरादेही अभयारण्य को चीते का तीसरा आवास बनाने की घोषणा की गई थी, जिसका नाम रानी दुर्गावती के नाम पर रखा गया है। 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में देश में चीतों की ऐतिहासिक वापसी हुई थी, और अब यह क्रम जंगली भैंसों से आगे बढ़ रहा है।
कान्हा प्रबंधन का मानना है कि जंगली भैंसों की वापसी से वन्यजीव पर्यटन को भी नई रफ्तार मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार सभी भैंसे पूरी तरह स्वस्थ हैं और नए बाड़े में अच्छी तरह ढल रहे हैं।
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