मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में मरने वाले चीतों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर पर्दा बना रहेगा। वन विभाग ने यह रिपोर्ट सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। RTI के तहत मांगी गई जानकारी नहीं दी जाएगी। विभाग ने RTI कानून की धारा 8(1)(a) का हवाला दिया है। इसके मुताबिक, खुलासे से “किसी विदेशी राज्य के साथ भारत के संबंधों पर प्रतिकूल असर” पड़ सकता है।
यह जानकारी 9 अक्टूबर के एक पत्र में दी गई। पत्र लोक सूचना अधिकारी और DFO अमर श्रीकृष्ण ने लिखा है। उनके अनुसार, Project Cheetah एक राष्ट्रीय परियोजना है। इसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल है। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के साथ औपचारिक समझौते (MoU) हुए हैं। इसलिए कूनो मंडल यह जानकारी देने के लिए “सक्षम” नहीं है।
यह RTI आवेदन भोपाल के वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने दाखिल किया था। आवेदन 28 जनवरी का है। उन्होंने चार बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इनमें अधिकारियों के विदेश दौरों का ब्यौरा शामिल था। 1 जनवरी 2024 के बाद मरे चीतों के पोस्टमॉर्टम का विवरण भी मांगा गया था। विदेश दौरों के रिकॉर्ड पर कार्यालय ने कहा कि उसके पास कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
कार्यकर्ता का सवाल: विदेशी हित नागरिक अधिकारों से ऊपर क्यों?
दुबे ने इस इनकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शव-परीक्षण रिपोर्ट से विदेशी संबंधों को नुकसान कैसे पहुंच सकता है? यह बात समझ से परे है। उन्होंने पूछा कि विदेशी हितों को नागरिकों के अधिकारों से ऊपर क्यों रखा जा रहा है? नागरिकों को अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत सूचना का अधिकार है। जवाबदेही के लिए पारदर्शिता जरूरी है।
गौरतलब है कि करीब 73 दिन पहले राज्य सूचना आयोग ने भी दखल दिया था। आयोग ने Project Cheetah के निदेशक को तलब किया था। तब भी धारा 8(1)(a) और 8(1)(j) का हवाला दिया गया था। कूनो में चीता शावकों के जन्म की खबरें आती रहती हैं। लेकिन मरने वाले चीतों के कारणों पर अब भी पर्दा है। इस हफ्ते कान्हा से भी वन्यजीव संरक्षण की बड़ी खबर आई थी (TOI Bhopal)।
