मध्य प्रदेश में बिजली महंगी होने का झटका! कंपनियों ने 10% बढ़ोतरी की तैयारी

DR Times
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मध्य प्रदेश में बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी का खतरा मंडरा रहा है। राज्य की तीनों प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों ने 9 दिसंबर को MPERC (मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग) में होने वाली सुनवाई से पहले उपभोक्ताओं के लिए दरों में 10% से अधिक बढ़ोतरी की तैयारी कर ली है। कंपनियों ने ₹4,107 करोड़ के घाटे का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है।

अधिकारियों का कहना है कि बिजली की खरीद महंगी हो रही है और लाइन लॉस को कम करने में कंपनियां पूरी तरह सफल नहीं हो पाई हैं। इसके अलावा, सब्सिडी का भार भी बढ़ रहा है, जिसका ठीकरा सीधे जनता पर फोड़ा जा रहा है। इस बढ़ोतरी का प्रभाव घरों, खेतों, उद्योगों और फैक्ट्रियों तक महसूस किया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह बढ़ोतरी लागू हो गई, तो अप्रैल 2026 से नए बिजली रेट प्रभावी हो सकते हैं। इसका मतलब यह है कि उपभोक्ताओं को हर महीने के बिजली बिल में पहले से अधिक राशि चुकानी होगी। खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए यह बढ़ोतरी बड़ी चुनौती बन सकती है।

सरकारी योजना “अटल गृह ज्योति” के तहत कुछ उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है, लेकिन बाकी सभी उपभोक्ताओं पर बिजली की बढ़ी हुई दरों का भार पड़ना तय है। बिजली कंपनियों ने आयोग से यह आग्रह किया है कि घाटे की भरपाई के लिए दरों में बढ़ोतरी जरूरी है।

विद्युत विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी केवल कंपनियों के घाटे को कवर करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में बढ़ती बिजली की मांग और महंगी खरीद लागत को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। वहीं, उपभोक्ता संगठन इस बढ़ोतरी को लेकर चिंतित हैं और आयोग से अपील कर रहे हैं कि जनता पर अतिरिक्त बोझ न डाला जाए।

MPERC की सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितनी प्रतिशत बढ़ोतरी स्वीकृत की जाती है। इसके बावजूद, पहले से ही उपभोक्ताओं के बीच चिंता की लहर फैल गई है। किसान, छोटे व्यवसायी और आम घर-घर के लोग इस बढ़ोतरी से सीधे प्रभावित होंगे।

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