मध्यप्रदेश कांग्रेस ने मंगलवार को भोपाल में चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर धरना दिया। यह प्रदर्शन दिल्ली में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की हिरासत के विरोध में किया गया। धरने का नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने किया।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विधायक, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी बाद में धरना स्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों के साथ बैठे। कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की और CEC का पुतला फूंका।
पुतला दहन और हर जिले में आंदोलन का ऐलान
जीतू पटवारी ने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और सवाल पूछना हर जनप्रतिनिधि का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने ऐलान किया कि कांग्रेस अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और CEC ज्ञानेश कुमार के पुतले प्रदेश के हर जिले में फूंकेगी।
पटवारी ने पार्टी पर लगे आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस मतदाता सूची की कथित अनियमितताओं पर जवाब मांग रही है और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता बचाने के लिए सड़कों पर उतरी है। उनके अनुसार, यह प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए है।
उमंग सिंघार ने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की हिरासत लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। धरने के दौरान गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के खिलाफ भी नारे लगाए गए। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।
दिल्ली में क्या हुआ था
दिल्ली में मंगलवार को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग तक मार्च निकालने की कोशिश की थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आकाशवाणी भवन के पास रोक दिया, जिसके बाद नेता वहीं धरने पर बैठ गए।
कई घंटों बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया। पुलिस के अनुसार, इस प्रदर्शन के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी। बाद में सभी हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा कर दिया गया।
इसके बाद बुधवार को दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई सांसदों के खिलाफ आकाशवाणी भवन परिसर में बिना अनुमति घुसने के आरोप में FIR भी दर्ज कर ली। इस FIR पर Dainik Rajeev Times की विस्तृत खबर पहले ही प्रकाशित हो चुकी है।
