मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा नदी के किनारे बड़ी संख्या में मतदाता पहचान पत्र मिलने का मामला अब राजनीतिक विवाद में बदल गया है। रविवार सुबह मंडलेश्वर घाट पर सफाई अभियान के दौरान ये कार्ड मिले थे। जानकारी के अनुसार, निस्वार्थ सेवा समिति के सदस्य नर्मदा घाट की सफाई कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें पानी में तैरते और किनारे पड़े मतदाता पहचान पत्र दिखे। सूचना मिलते ही राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कार्डों को जब्त करके उनका आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार किया।
ज्यादातर कार्ड राऊ क्षेत्र के बताए जा रहे हैं
रिपोर्टों के अनुसार, मिले कार्डों की संख्या 343 बताई जा रही है। इनमें से ज्यादातर कार्ड इंदौर के राऊ विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं के बताए जा रहे हैं। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद ही कार्डों की सही संख्या सामने आएगी। महेश्वर की अनुविभागीय अधिकारी पूर्वा मांडलोई ने बताया है कि तहसीलदार को मामले की जांच सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। मंडलेश्वर पुलिस के अनुसार, इस मामले में लिखित शिकायत भी मिली है और थाना प्रभारी को जांच सौंपी गई है।
कांग्रेस ने FIR की मांग की
कांग्रेस ने इस घटना पर चुनाव आयोग से सवाल उठाए हैं। पार्टी ने सोशल मीडिया पर कहा है कि हर दिन वोट चोरी के सबूत सामने आ रहे हैं। कांग्रेस ने पूछा है कि ये कार्ड महेश्वर तक कैसे पहुंचे और इन्हें किसने फेंका। पार्टी ने FIR दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची से जुड़े दस्तावेजों की सुरक्षा में लापरवाही हुई है। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस के हैं, इन्हें सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इंदौर के मतदाताओं के पहचान पत्र खरगोन के घाट तक कैसे पहुंचे। क्या ये कार्ड गलती से फेंके गए, या इन्हें जानबूझकर नष्ट करने की कोशिश की गई, यह जांच के बाद ही पता चलेगा। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से इस मामले में अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रशासन की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ होगा कि कार्डों के मिलने के पीछे की वजह क्या थी।
स्रोत: Times Now — संबंधित खबर:
