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Indian Navy Corvettes: ₹53,866 करोड़ में 8 युद्धपोत

Dainik R Times
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रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को भारतीय नौसेना के लिए आठ नए युद्धपोतों का सौदा किया। यह सौदा 53,866.50 करोड़ रुपये का है। मंत्रालय ने यह अनुबंध गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) के साथ किया है। इन जहाजों को नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट (Indian Navy Corvettes) कहा जाएगा।

Indian Navy Corvettes: पहली बार नौसेना का अपना डिज़ाइन

यह सौदा नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में हुआ। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए। GRSE पाँच कॉर्वेट बनाएगी और गोवा शिपयार्ड तीन जहाज तैयार करेगा। द हिंदू के अनुसार पहला जहाज 2030 तक नौसेना को मिलेगा।

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका डिज़ाइन है। पहली बार भारतीय नौसेना ने खुद युद्धपोतों का डिज़ाइन तैयार किया है। इसके बाद प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से चुने गए सरकारी शिपयार्ड इन्हें बनाएँगे। रक्षा मंत्रालय ने इसे स्वदेशी डिज़ाइन और निर्माण की बड़ी उपलब्धि बताया है।

रक्षा अधिग्रहण परिषद ने जून 2022 में इस परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। तब इसकी अनुमानित लागत करीब 36,000 करोड़ रुपये थी। अब मंत्रालय ने 53,866.50 करोड़ रुपये के अनुबंध किए हैं। वाणिज्यिक बोलियाँ मई 2025 में खोली गई थीं। इनमें GRSE सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी रही।

आधुनिक हथियारों से लैस होंगे आठों जहाज

आठों कॉर्वेट आधुनिक मिसाइलों, हथियारों और सेंसरों से लैस होंगे। ये जहाज हवा, समुद्र की सतह और पानी के नीचे — तीनों क्षेत्रों में अभियान चला सकेंगे। इनका इस्तेमाल पनडुब्बी रोधी युद्ध, समुद्री निगरानी और तटीय रक्षा में होगा।

ये जहाज नौसेना के पुराने खुकरी श्रेणी के कॉर्वेट की जगह लेंगे। खुकरी श्रेणी के आईएनएस कुठार और आईएनएस खंजर अभी सेवा में हैं। इसके साथ ही चार कोरा श्रेणी के जहाज भी धीरे-धीरे हटाए जाएँगे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सौदे का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि जहाजों के निर्माण से शिपयार्डों में करीब 72 लाख मानव-दिवस का रोजगार मिलेगा। सहायक उद्योगों और सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों में 460 लाख मानव-दिवस का काम पैदा होगा। इस तरह दस साल में कुल 5.32 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार बनेगा।

यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की दिशा में बड़ा कदम है। इससे देश के जहाज निर्माण तंत्र को मजबूती मिलेगी। सरकारी शिपयार्डों के साथ निजी उद्योग और छोटे उद्यम भी इस काम से जुड़ेंगे। स्वदेशी डिज़ाइन की यह पहल भविष्य के युद्धपोतों के लिए रास्ता खोलेगी।

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