स्टॉकहोम। Nobel Prize Medicine 2026 का ऐलान सोमवार, 5 अक्टूबर को हुआ। स्वीडन के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट की नोबेल असेंबली ने यह सम्मान तीन वैज्ञानिकों — अमेरिका के कार्ल डाइसेरोथ और जर्मनी के पीटर हेगेमन व ग्योर्ग नागेल को दिया है।
तीनों को “लाइट-गेटेड आयन चैनलों और ऑप्टोजेनेटिक्स से जुड़ी खोजों” के लिए चुना गया। ऑप्टोजेनेटिक्स वह तकनीक है जिससे जीवित दिमाग की अलग-अलग नसों (न्यूरॉन्स) की गतिविधि को रोशनी से चालू या बंद किया जा सकता है। तीनों वैज्ञानिक 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (करीब 1.2 मिलियन डॉलर) की पुरस्कार राशि साझा करेंगे।
ऑप्टोजेनेटिक्स क्या है — Nobel Prize Medicine 2026 की खोज
कहानी 1990 के दशक में शुरू हुई। तब जर्मनी के मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट में काम कर रहे पीटर हेगेमन यह समझना चाहते थे कि क्लैमाइडोमोनास नाम का एककोशिकीय शैवाल रोशनी की ओर इतनी तेजी से कैसे तैरता है। उन्होंने पाया कि इसकी वजह एक प्रकाश-संवेदनशील प्रोटीन है।
2000 के दशक में हेगेमन ने ग्योर्ग नागेल के साथ मिलकर दिखाया कि यह प्रोटीन एक स्विच की तरह काम करता है। रोशनी पड़ते ही यह आयन चैनल खोल देता है। इस प्रोटीन को चैनलरोडोप्सिन नाम दिया गया। नोबेल कमेटी के मुताबिक वैज्ञानिक लंबे समय से ऐसे ही स्विच का सपना देख रहे थे।
इसके बाद स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के कार्ल डाइसेरोथ ने इस खोज को आगे बढ़ाया। 2005 में उन्होंने दिखाया कि इस प्रोटीन का इस्तेमाल चूहों की नसों को कंट्रोल करने में किया जा सकता है। 2006 में इस तकनीक को ऑप्टोजेनेटिक्स नाम मिला। आज यह दुनियाभर की प्रयोगशालाओं में दिमाग के रहस्य खोलने के काम आ रही है।
इस तकनीक से याददाश्त, भावनाओं और व्यवहार को नियंत्रित करने वाले न्यूरल सर्किट की पहचान संभव हुई है। 2021 में पहली बार रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा से पीड़ित एक नेत्रहीन मरीज की आंशिक दृष्टि इसी तकनीक से लौटी थी।
पुरस्कार की घोषणा के भावुक पल
घोषणा के बाद तीनों वैज्ञानिकों की प्रतिक्रियाएं भी चर्चा में रहीं। 54 वर्षीय डाइसेरोथ को खबर तब मिली जब वे रात में एक पेपर पर काम खत्म कर सोने जा रहे थे। उन्होंने बताया कि करीब 30 सेकंड तक वे शब्द नहीं बना पाए।
वहीं 73 वर्षीय नागेल उस समय इटली में एक छत पर धूप सेंक रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें इस पुरस्कार की उम्मीद नहीं थी, क्योंकि अब तक सिर्फ एक मरीज को ही इस तकनीक से फायदा हुआ है। 71 वर्षीय हेगेमन बर्लिन के हम्बोल्ट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं।
मेडिसिन का नोबेल हर साल नोबेल सप्ताह की शुरुआत करता है। इसके बाद फिजिक्स, केमिस्ट्री, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र के पुरस्कारों की घोषणा होगी। पिछले साल यह सम्मान इम्यून सिस्टम पर काम के लिए तीन वैज्ञानिकों को मिला था।
स्वदेशी HPV वैक्सीन Cervavac को WHO की मुहर जैसी चिकित्सा-विज्ञान की बड़ी खबरों पर हमारी नजर बनी है। रॉयटर्स के मुताबिक पुरस्कार राशि तीनों विजेताओं में बराबर बंटेगी।
