नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि सदन में ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए। पीएम मोदी ने मीडिया से बातचीत में विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह संसद को राजनीतिक रंगमंच बनाकर अपनी हार की बौखलाहट निकालने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद में बहस का उद्देश्य केवल दिखावा या नाटक नहीं होना चाहिए, बल्कि गंभीर और सार्थक चर्चा होनी चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा, “मेरा आग्रह रहेगा कि संसद में चर्चा को गंभीरता से लें। ड्रामा करने के लिए बहुत जगह होती है, जिसे करना है करता रहे, लेकिन यहाँ ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए।’’ उनका यह बयान संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन सामने आया, जिसमें कई संवेदनशील मुद्दों जैसे SIR और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस होना तय है।
कांग्रेस ने दिया पलटवार
पीएम मोदी के बयान के बाद कांग्रेस ने पलटवार किया। पार्टी ने प्रधानमंत्री को सबसे बड़े ‘ड्रामेबाज’ तक कह दिया। कांग्रेस का कहना है कि असल मुद्दों पर चर्चा करने की बजाय प्रधानमंत्री संसद से बाहर खड़े होकर विपक्ष को नसीहत दे रहे हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ट्विटर (X) पर लिखा कि प्रधानमंत्री खुद संसद में उपस्थित नहीं रहते और विपक्ष से संवाद नहीं करते। फिर भी हर सत्र से पहले वह मीडिया के सामने भाषण देकर विपक्ष से रचनात्मक सहयोग की अपील करते हैं।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यदि संसद सुचारू रूप से नहीं चलती तो इसका दोष पूरी तरह प्रधानमंत्री पर है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपने मुद्दों जैसे SIR, प्रदूषण, बेरोजगारी और अन्य सार्वजनिक मुद्दों को उठाने का अवसर ही नहीं दिया जा रहा। यह हालात संसद की गरिमा और लोकतंत्र की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं।
राजनीतिक माहौल
इस बयानबाजी के बीच संसद का माहौल पहले से ही तनावपूर्ण है। विपक्ष और सरकार के बीच टकराव के संकेत पहले ही मिल चुके थे। कांग्रेस के अनुसार, असली मुद्दों पर बहस करने की जगह प्रधानमंत्री केवल ‘ड्रामा’ को ही रोकने की बात कर रहे हैं। सांसद प्रियंका गांधी और जयराम रमेश जैसे नेताओं ने जोर देकर कहा कि संसद का उद्देश्य जनता के सामने मुद्दों को उठाना और उनके समाधान की दिशा में बहस करना है।

