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Punjab CBI Probe: Justice Nagu ने सुनवाई से किया इनकार

Dainik R Times
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नई दिल्ली। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई जांच को चुनौती देने वाली पंजाब सरकार की याचिका की सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस शील नागू ने खुद को अलग कर लिया है। शुक्रवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता ने साफ कहा कि यह मामला अब जस्टिस नागू नहीं सुनेंगे और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) इसे किसी दूसरी बेंच को सौंपेंगे।

मामला जस्टिस दत्ता और जस्टिस नागू की बेंच के सामने था। सुनवाई शुरू होते ही जस्टिस दत्ता ने कहा, “इसे जस्टिस नागू नहीं सुन सकते; CJI इसे दूसरी बेंच को सौंपेंगे।” गौरतलब है कि गुरुवार को सुनवाई एक दिन के लिए टल गई थी क्योंकि केस की फाइल जस्टिस नागू तक देर से पहुंची थी।

राज्य सरकार के वकील ने क्या कहा

राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने बताया कि जस्टिस नागू ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहते उस PIL याचिकाकर्ता की याचिकाएं खारिज की थीं, जिसकी याचिका पर हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया था। हालांकि गुप्ता ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार उन पुराने आदेशों पर भरोसा नहीं कर रही है।

फिर भी जस्टिस दत्ता ने कहा कि जज खुद को अलग करेंगे। उन्होंने टिप्पणी की, “हम बहुत कठिन समय में हैं। पता नहीं हमला कहां से आएगा। 17 अन्य बेंचें हैं।” जस्टिस नागू जून 2026 में सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने से पहले पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे।

मामले की पृष्ठभूमि

पंजाब सरकार ने SLP दायर कर हाई कोर्ट के 5 अक्टूबर के आदेश को चुनौती दी है। उस आदेश में हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए सीबीआई को आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।

यह निर्देश अधिवक्ता निखिल सराफ की PIL पर आया था। आरोप था कि ED की सूचना के बावजूद पंजाब पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। ED ने पंजाब DGP को लिखे पत्रों में तबादलों-पोस्टिंग, टेंडरों, नीतियों, मंजूरियों और गोपनीय सामग्री तक पहुंच से जुड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। हाई कोर्ट ने सीबीआई को दो महीने में रिपोर्ट देने को भी कहा था।

अब आगे क्या

सीबीआई इस मामले में FIR दर्ज कर चुकी है और चंडीगढ़ व पंजाब में आठ ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। इनमें चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित मुख्यमंत्री का कैंप कार्यालय और संगरूर-मोहाली में घुम्मन से जुड़े परिसर शामिल हैं। बुधवार को घुम्मन और अन्य सहयोगियों को समन भी भेजा गया था।

सरकार के वकील विकास सिंह ने मंगलवार को CJI के सामने तत्काल सुनवाई की मांग की थी और दावा किया था कि मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है, क्योंकि राज्य में जल्द चुनाव हैं। गुरुवार को भी राज्य सरकार को कोई अंतरिम राहत नहीं मिली थी। अब CJI नई बेंच का गठन करेंगे और सीबीआई की जांच जारी रहेगी। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है।

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