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रीवा अस्पताल हादसे पर सियासत तेज: बच्चे की मौत पर BJP-Congress आमने-सामने

रीवा अस्पताल हादसे पर सियासत तेज: बच्चे की मौत पर BJP-Congress आमने-सामने

भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक सरकारी अस्पताल में बच्चे की जलकर मौत की घटना सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस दर्दनाक हादसे को लेकर जहां कांग्रेस ने सीधे तौर पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है, वहीं भाजपा ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

घटना के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी

रीवा के अस्पताल में हुई इस हृदयविदारक घटना के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था में भारी लापरवाही बताते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल से इस्तीफे की मांग कर दी। कांग्रेस का कहना है कि यदि अस्पतालों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होते, तो एक मासूम की जान नहीं जाती।

भाजपा का पलटवार

कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा प्रवक्ता राजपाल सिसोदिया ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बच्चे की मौत बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार इस मामले को हल्के में नहीं ले रही है और पूरे घटनाक्रम की गहन जांच कराई जाएगी।

राजपाल सिसोदिया ने साफ कहा कि यदि जांच में किसी भी तरह की मानवीय भूल या लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी।

कांग्रेस पर साधा निशाना

भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस का काम केवल आरोप लगाना रह गया है। हर घटना को राजनीतिक रंग देना उनकी आदत बन चुकी है। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में राजनीति करने के बजाय सभी को पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होना चाहिए।

सरकार की जिम्मेदारी और जांच का भरोसा

भाजपा ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की पहली प्राथमिकता पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है। जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह अधिकारी हो या कर्मचारी, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सभी सुरक्षा मानकों की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पतालों में सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम जनता यह जानना चाहती है कि अस्पतालों में आग से बचाव और आपातकालीन व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी हैं। सरकार के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह केवल जांच तक सीमित न रहे, बल्कि ठोस सुधारात्मक कदम भी उठाए।

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