मध्यप्रदेश के सागर जिले में स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बुधवार को दो चीते छोड़े गए। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर इन चीतों को रिजर्व में छोड़ा।
कूनो नेशनल पार्क से लाए गए इन दो चीतों में नर चीता ‘थोलो’ और मादा चीता ‘सीसीबी-3’ शामिल हैं। इनके आने के बाद यह रिजर्व मध्यप्रदेश में चीतों का तीसरा बसेरा बन गया है। इससे पहले कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर अभयारण्य में चीते बसाए जा चुके हैं।
439 हेक्टेयर में तैयार खास बसेरा
वन विभाग ने चीतों के लिए करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष इंतजाम किए हैं। यहां आधुनिक बाड़ों और अन्य सुविधाओं से लैस सुरक्षित आवास तैयार किया गया है। चीतों की सुरक्षा, नियमित निगरानी और स्वास्थ्य देखभाल के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, चीतों की मौजूदगी से सागर और बुंदेलखंड क्षेत्र में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व
वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में करीब 2,339 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। पहले इसे नौरादेही टाइगर रिजर्व के नाम से जाना जाता था, और सितंबर 2023 में इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था।
यह रिजर्व बाघ, तेंदुए, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू जैसे वन्यजीवों का घर है। संकटग्रस्त भारतीय गिद्धों के संरक्षण के लिहाज से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण माना जाता है।
उल्लेखनीय है कि चीता परियोजना के तहत मध्यप्रदेश में चीतों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। कूनो नेशनल पार्क में हाल ही में पांच शावकों का जन्म भी हुआ है। कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि सागर में चीतों के आने से पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
