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SC Library: केंद्र को नोटिस, 3 हफ्ते में हलफनामा

Dainik R Times
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SC Library मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर तीन हफ्तों में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने केंद्र से यह भी पूछा कि प्रस्तावित नई जगह 135 साल पुरानी Central Secretariat Library की सभी किताबों के लिए पर्याप्त होगी या नहीं।

कोर्ट ने केंद्र से कहा कि वह हलफनामे में लाइब्रेरी के लिए आवंटित क्षेत्र का पूरा ब्योरा और असली लेआउट प्लान पेश करे। इसके साथ ही यह भी बताना होगा कि नई जगह में शास्त्री भवन की किताबों के अलावा आरके पुरम में पड़ी करीब दो लाख किताबों के लिए भी पर्याप्त जगह है या नहीं।

SC Library पर कोर्ट ने क्या टिप्पणी की

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कुमार ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पूछा, “अखबार की रिपोर्ट के अनुसार यह लाइब्रेरी 1891 की है, जिसमें 1702 के लेखन तक मौजूद हैं। आप कर्तव्य भवन में सिर्फ दो कमरे आवंटित कर रहे हैं, बस इतना ही?” उन्होंने कहा कि कागज कम करने का मतलब यह नहीं कि पहले से मौजूद कीमती दस्तावेजों की देखभाल न की जाए।

भाटी ने कहा कि मुद्दा उठने के बाद उन्होंने एक रिपोर्ट बेंच को सौंपी है, जिसमें सभी शंकाओं का जवाब है, इसलिए नोटिस जरूरी नहीं। हालांकि, न्यायमूर्ति कुमार ने कहा कि केंद्र को वचनबद्धता के साथ हलफनामा दाखिल करना होगा। उन्होंने पूछा कि क्या प्रस्तावित जगह में वे दो लाख किताबें शामिल हैं, जो 2011 से आरके पुरम में डिब्बों में बंद पड़ी हैं। भाटी ने कहा कि दो मंजिलों पर मौजूदा से बड़ी जगह की योजना है।

135 साल पुरानी लाइब्रेरी का इतिहास

Central Secretariat Library की शुरुआत 1891 में हुई थी, जब यह इंपीरियल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के नाम से जानी जाती थी। 1911 में जब राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित हुई, तो लाइब्रेरी भी साथ आई। बाद में यह नॉर्थ ब्लॉक से होते हुए 1969 से शास्त्री भवन में स्थित है, जहां करीब 8.5 लाख किताबें रखी हैं।

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत शास्त्री भवन को गिराए जाने की योजना है, लेकिन आवास और शहरी कार्य मंत्रालय तथा सीपीडब्ल्यूडी अब तक लाइब्रेरी के लिए जगह नहीं खोज पाए हैं। इस साल जनवरी में संपदा निदेशालय ने कर्तव्य भवन-2 में 300 वर्गमीटर के दो कमरे आवंटित किए थे, लेकिन संस्कृति मंत्रालय ने इसे नाकाफी बताकर खारिज कर दिया था। केंद्र ने लाइब्रेरी हटाने की खबरों का खंडन किया है। गौरतलब है कि सुनवाई से पहले ही इस मामले ने तूल पकड़ लिया था। रिपोर्टों के अनुसार कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता हरि प्रिया पद्मनाभन को amicus curiae नियुक्त किया है और मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। वहीं आज ही CEC मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश दिया था। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार बेंच ने इस मामले का संज्ञान उसी अखबार की 30 सितंबर की रिपोर्ट के आधार पर लिया था।

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