कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ चल रहे Rahul Gandhi Defamation Case की सुनवाई पर रोक लगा दी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की बेंच ने यह अंतरिम आदेश दिया। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता महेश श्रीश्रीमाल को नोटिस जारी कर चार हफ्ते बाद सुनवाई तय की है।
2018 के ‘चौकीदार चोर है’ बयान पर केस
यह मामला 2018 में राफेल सौदे को लेकर दिए गए बयानों से जुड़ा है। आरोप है कि राहुल गांधी ने राजस्थान में एक रैली में ‘हिंदुस्तान का चौकीदार चोर है’ कहा था। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री को ‘कमांडर इन थीफ’ बताया। भाजपा सदस्य महेश श्रीश्रीमाल ने इन बयानों को मानहानिकारक बताते हुए शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना था कि इन टिप्पणियों से न केवल प्रधानमंत्री, बल्कि भाजपा से जुड़े लोगों की छवि भी खराब हुई।
Rahul Gandhi Defamation Case का अब तक का सफर
गिरगांव की मजिस्ट्रेट अदालत ने 2019 में इस शिकायत पर कार्यवाही शुरू की थी। राहुल गांधी ने 2021 में बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आरोपों से इनकार करते हुए कार्यवाही रद्द करने की मांग की। लेकिन इस साल 8 सितंबर को जस्टिस एनआर बोरकर की एकल बेंच ने समन रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट के आदेश में कोई स्पष्ट गैरकानूनी बात नहीं दिखती। इसके बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश के अमल पर छह हफ्ते की रोक लगाई, ताकि राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट जा सकें।
शीर्ष अदालत में वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि यह कार्यवाही चलने लायक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि मामले के विचाराधीन रहने तक ट्रायल कोर्ट की सुनवाई रुकी रहेगी। यह रोक अंतिम फैसला नहीं है — अदालत अभी बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील पर विचार करेगी। हाल में राहुल गांधी की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी चर्चा में रही थी। मामले की विस्तृत जानकारी द हिंदू की इस रिपोर्ट में दी गई है।
