सीहोर के निजी स्कूल में अमानवीय कृत्य: होमवर्क न करने पर बच्चों को अर्धनग्न कर घुमाने और सफाई कराने का गंभीर आरोप

सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। जाताखेड़ा गांव स्थित सेंट एंजेलास निजी स्कूल में मासूम बच्चों के साथ कथित तौर पर अमानवीय और क्रूर व्यवहार किए जाने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि होमवर्क नहीं करने पर बच्चों के जबरन कपड़े उतरवाकर उन्हें अर्धनग्न अवस्था में ठंड में खड़ा किया गया और पूरी क्लास में घुमाया गया।
मामले से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया। बच्चों और उनके परिजनों का आरोप है कि शिक्षकों का अत्याचार यहीं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों से झाड़ू लगवाई गई, मैदान की सफाई करवाई गई और पेड़-पौधों में पानी भी डलवाया गया। शिक्षा ग्रहण करने आए बच्चों से इस तरह का व्यवहार मानवता को झकझोर देने वाला है।
बच्चों ने कैमरे पर सुनाई आपबीती
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बच्चों ने खुद कैमरे पर आकर अपनी पीड़ा बताई। बच्चों का कहना है कि उन्हें अर्धनग्न कर मुर्गा बनाया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें हाथों में कलावा और माथे पर तिलक लगाने से रोका जाता था, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
बजरंग दल और ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन
घटना सामने आते ही बजरंग दल, सामाजिक संगठनों, ग्रामीणों और अभिभावकों ने स्कूल पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हालात इतने बिगड़ गए कि मंडी थाना पुलिस को भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। स्थिति को काबू में रखने के लिए प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा और लाठीचार्ज जैसी नौबत से पहले ही भीड़ को नियंत्रित किया गया।
शिक्षा विभाग की सख्त कार्रवाई
शिकायत मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) संजय सिंह तोमर मौके पर पहुंचे और स्कूल की गहन जांच की। जांच में शिकायतें सही पाए जाने पर शिक्षा विभाग ने स्कूल पर तत्काल 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और स्कूल प्रिंसिपल समरीन खान तथा ड्राइवर को तत्काल प्रभाव से हटा दिया।
पुलिस जांच जारी
सीएसपी अभिनंदना शर्मा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। जल्द ही प्रिंसिपल और संबंधित शिक्षकों के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है। प्रशासन और पुलिस की ओर से सख्त कार्रवाई के आश्वासन के बाद प्रदर्शन कर रहे लोग शांत हुए।
यह घटना एक बार फिर निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती है।





