अमेरिका के छह डेमोक्रेटिक सांसदों ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर मांग की है कि वे अपनी आगामी भारत यात्रा के दौरान भारतीय अधिकारियों के समक्ष छात्र प्रदर्शनों से निपटने के तरीके का मुद्दा उठाएं। सांसदों ने दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सुरक्षा बलों द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग, गलत हिरासत और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पाबंदियों पर चिंता जताई है।
पत्र पर प्रमिला जयपाल, इल्हान उमर, जिम मैकगवर्न, रशीदा त्लैब, एलेनोर होम्स नॉर्टन और जीसस गार्सिया के हस्ताक्षर हैं। सांसदों ने लिखा कि उन्हें दिल्ली और भारत के अन्य इलाकों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा दमन, गलत हिरासत और अत्यधिक बल प्रयोग के पैटर्न को लेकर चिंता है।
CJP प्रदर्शनों और SIR का जिक्र
सांसदों ने अपने पत्र में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े प्रदर्शनों का हवाला दिया — तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ हुए प्रदर्शन और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन। जयपाल ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूचियों से कथित तौर पर 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर भी चिंता जताई और CJP को समर्थन दिया।
सांसदों ने यह भी आरोप लगाया कि वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास और अमेरिका के अन्य शहरों में वाणिज्य दूतावासों ने CJP के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों की निगरानी के लिए फोटोग्राफर तैनात किए। उन्होंने रुबियो से आग्रह किया कि वे कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच और शांतिपूर्ण विरोध के लिए हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई का मुद्दा उठाएं।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत के अमेरिका में राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने जयपाल की टिप्पणियों को भारत के आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य हस्तक्षेप करार दिया था। रुबियो की भारत यात्रा के दौरान मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात प्रस्तावित है। इस पत्र के बाद दोनों देशों के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक स्वतंत्रता पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।
