मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर तीन बड़े खतरे गिनाए हैं। उनका कहना है कि अमेरिका के साथ अस्थिर संबंध, वैश्विक ऊर्जा कीमतें और भारत में “AI प्ले” की कमी — ये तीनों ही देश के सामने सबसे बड़ी CEA economic headwinds बनकर खड़े हैं।
नागेश्वरन मुंबई में 13वें SBI Banking & Economics Conclave 2026 में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन का हथियार की तरह इस्तेमाल और चीन से प्रतिस्पर्धा के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था लचीली (resilient) बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आगे की राह आसान नहीं है।
CEA economic headwinds: 3 खतरे कौन से?
पहला खतरा है अमेरिका के साथ “अस्थिर रिश्ते”। नागेश्वरन ने पहले भी भारत-अमेरिका संबंधों को “uneasy equilibrium” यानी असहज संतुलन करार दिया था। व्यापार और टैरिफ को लेकर जारी तनाव से निर्यात पर दबाव बढ़ सकता है।
दूसरा खतरा वैश्विक ऊर्जा कीमतों का है। तेल और गैस के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ती है और चालू खाता घाटा चौड़ा होता है। तेल और सोने को छोड़कर भारत का व्यापार घाटा GDP का करीब 3.5–4 फीसदी है।
तीसरा खतरा है भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मजबूत रणनीति का न होना। नागेश्वरन के मुताबिक, AI-तैयार नौकरियों और तकनीकी निवेश के बिना भारत भविष्य की अर्थव्यवस्था की दौड़ में पीछे रह सकता है।
2047 तक विकसित राष्ट्र का लक्ष्य
CEA ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए विनिर्माण (manufacturing) को मजबूत करना होगा। विदेशी निवेश बढ़ाना और निर्यात प्रतिस्पर्धा सुधारना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों से काम करने के तरीकों पर फिर से सोचने की अपील की। उनका कहना था, “हमें खुद को नए सिरे से कल्पना करना होगा और अपने काम करने के कई तरीकों को बदलने के लिए तैयार रहना होगा — चाहे आप निजी क्षेत्र में हों या सार्वजनिक क्षेत्र में।”
आर्थिक आंकड़े बताते हैं कि रुपया भी डॉलर के मुकाबले दबाव में है और RBI को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। ऐसे में CEA की चेतावनी निवेशकों और नीति-निर्माताओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। पूंजी बाजार में JSW One जैसे बड़े IPO भी इसी आर्थिक माहौल का हिस्सा हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका से व्यापारिक तनाव कम हुआ और ऊर्जा कीमतें स्थिर रहीं, तो भारत की विकास दर पटरी पर बनी रहेगी। लेकिन AI में निवेश की कमी एक ऐसा जोखिम है, जिस पर सरकार को तुरंत ध्यान देना होगा। Reuters के मुताबिक, CEA ने इस अस्थिर संतुलन को आर्थिक जोखिम करार दिया है।

