उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को भदोही जिले का नाम बदलकर ‘Sant Ravidas Nagar Bhadohi’ करने का ऐलान कर दिया। उन्होंने भदोही में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, “अब हमारा भदोही जिला Sant Ravidas Nagar Bhadohi कहलाएगा।” मुख्यमंत्री ने इसी कार्यक्रम में 112 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया, जिनकी कुल लागत 1,340 करोड़ रुपये से अधिक है।
योगी ने कहा कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उन्होंने वादा किया था कि कालीन उद्योग के लिए मशहूर भदोही को भविष्य में संत रविदास जी महाराज के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने संत रविदास को मध्यकालीन संत बताया, जिन्होंने आध्यात्मिक भक्ति के माध्यम से समाज को जोड़ा और एकता का संदेश दिया।
समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तीर्थस्थलों के विकास और धरोहरों के संरक्षण पर जो धन खर्च हो रहा है, वही धन 2017 से पहले कब्रिस्तानों की चहारदीवारी के नाम पर जमीन कब्जाने में लगाया जाता था। उनका कहना था कि डबल इंजन सरकार ने इस प्रवृत्ति को रोका और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई।
योगी ने खुद X (पूर्व ट्विटर) पर भी इस ऐलान की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि सद्गुरु रविदास जी महाराज के नाम पर भदोही जाना जाएगा। घोषणा के बाद से ही राजनीतिक हलकों में इस फैसले पर चर्चा तेज हो गई है।
नाम का लंबा राजनीतिक इतिहास
इस जिले के नाम का लंबा राजनीतिक इतिहास रहा है। 1994 में वाराणसी से काटकर बनाए गए इस जिले को 1997 में तत्कालीन बसपा सरकार ने संत रविदास नगर नाम दिया था। बाद में 2014 में अखिलेश यादव की सपा सरकार ने इसका नाम वापस भदोही कर दिया था। अगस्त में वाराणसी में योगी ने फिर नाम बदलने की घोषणा की थी, जिस पर आज औपचारिक मुहर लग गई।
राजनीतिक जानकार इस फैसले को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। संत रविदास दलित समाज में बेहद पूजनीय हैं, और उनके नाम पर जिले का नाम भाजपा की दलित वोटरों तक पहुंच की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राष्ट्रीय राजनीति में हाल में राहुल गांधी का सत्याग्रह प्लेटफॉर्म और TMC से 2 अहम समितियों की कुर्सियां छिनीं जैसे मुद्दे भी छाए रहे। ETV Bharat की PTI रिपोर्ट के मुताबिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
