अमेरिका ने ईरान के साथ तेल और पेट्रोकेमिकल व्यापार के आरोप में Mumbai की दो कंपनियों और पांच भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को यह कार्रवाई “Operation Economic Outcast” अभियान के तहत की, जिसका मकसद ईरान की अवैध तेल आय पर रोक लगाना बताया गया है।
प्रतिबंधों के दायरे में आई कंपनियों के नाम SSPL Solutions Private Limited और Samudra Marine Services Private Limited हैं। अमेरिका का आरोप है कि इन कंपनियों ने ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात में मदद पहुंचाई। इसके साथ ही SSPL Solutions से जुड़े Dhwani Vora और Nisarg Vora तथा Samudra Marine Services से जुड़े Ketan Kochikar, Bhupendrasingh Sahu और Harishyam Hariharan Chundakattil पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
क्या-क्या आरोप लगाए गए
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, SSPL Solutions के निदेशक Dhwani Vora और Nisarg Vora ने फरवरी से जुलाई 2025 के बीच करीब 20 लाख डॉलर मूल्य के ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों का आयात किया। वहीं Samudra Marine Services एक कस्टम ब्रोकर के तौर पर ईरानी उत्पादों के आयात में सहायक रही। विभाग का कहना है कि इन संस्थाओं ने ईरानी शासन को लाखों डॉलर पहुंचाए, जो उसकी आय का एक प्रमुख जरिया है।
व्यापक अभियान का हिस्सा
यह कार्रवाई सिर्फ भारतीय कंपनियों तक सीमित नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कुल 10 संस्थाओं, 6 व्यक्तियों और 5 जहाजों पर प्रतिबंध की घोषणा की है। इसके अलावा अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 17 संस्थाओं और उनके “shadow fleet” जहाजों पर अलग से प्रतिबंध लगाए। तुर्की की Noorzad Petrokimya और UAE की ArabianPro Materials FZCO जैसी कंपनियां भी निशाने पर आईं। यह पूरा अभियान राष्ट्रपति Donald Trump के “Operation Economic Outcast” का हिस्सा है।
वित्त मंत्री Scott Bessent ने कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरानी शासन को उन फंडों से वंचित करना है, जिनका इस्तेमाल क्षेत्र में युद्ध जैसी गतिविधियों के लिए किया जाता है। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतिबंधित जहाज प्रबंधन कंपनियों पर ईरानी तेल ढोने वाले जहाजों के संचालन का आरोप है।
भारतीय कंपनियों के लिए राहत की खिड़की
प्रतिबंधों के साथ ही अमेरिका ने Samudra Marine Services को 23 अक्टूबर तक मौजूदा लेन-देन निपटाने के लिए “wind-down” अवधि दी है। इस दौरान कंपनी अपने पुराने कारोबार को समेट सकती है, ताकि अचानक रोक से जुड़ी दिक्कतें पैदा न हों।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका की ईरान नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से चर्चा चल रही है। अमेरिकी प्रशासन ने साफ किया है कि वह ईरानी पेट्रोकेमिकल व्यापार को चलाने वाले खरीदारों और विक्रेताओं — दोनों पक्षों पर कार्रवाई करेगा।
