नई दिल्ली: साकेत कोर्ट ने शनिवार को CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। सिंह का आरोप था कि उन्हें घर के बाहर गलत तरीके से रोका गया और वकीलों के प्रदर्शन में शामिल होने से रोका गया।
कोर्ट ने तत्काल रिहाई के निर्देश और पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट की मांग वाली याचिका भी ठुकरा दी। हालांकि समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार पुलिस ने सिंह को शाम को रिहा कर दिया।
याचिका में क्या आरोप थे
सिंह की याचिका में कहा गया था कि वह दो साथी वकीलों के साथ सुप्रीम कोर्ट की ओर जा रही थीं, जहां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ वकीलों का प्रदर्शन होना था। याचिका के मुताबिक घर के बाहर कार में बैठीं सिंह के साथ वकील तारा नरूला भी थीं, तभी दो गाड़ियों ने उनकी गाड़ी को आगे और पीछे से घेर लिया और पुलिसकर्मी गाड़ी के बाहर खड़े हो गए।
सिंह का आरोप था कि बिना कोई कानूनी आधार बताए उनकी आवाजाही पर रोक लगाई गई। याचिका में इस घटना को गलत तरीके से रोकना और बंधक बनाना बताया गया, साथ ही उनकी सुरक्षा और स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई गई। याचिका में पुलिस की एक कॉल का ब्योरा भी दिया गया था।
वकीलों के प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
यह याचिका ऐसे दिन दाखिल हुई, जब सुप्रीम कोर्ट के पास प्रदर्शन कर रहे [कई वकीलों को भी हिरासत में लिया गया था](https://dainikrajeevtimes.com/scba-seeks-cji-intervention-detained-protesting-lawyers-oct-10/)। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के आग्रह पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अधिकारियों से बात की, जिसके बाद हिरासत में लिए गए वकीलों को रिहा कराने के निर्देश दिए गए। लाइव अपडेट्स के अनुसार हिरासत के दौरान वकीलों ने यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में राष्ट्रगान भी गाया।
शनिवार को दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बड़े पैमाने पर हिरासतें कीं, जिनमें नेता और वकील दोनों शामिल रहे। रत्ना सिंह की याचिका पर कोर्ट का विस्तृत आदेश आना अभी बाकी है।
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