INDIA गठबंधन के “March for Democracy” के बाद सोमवार शाम सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने X पर समर्थन जताया। उन्होंने लिखा कि दिल्ली में “हज़ारों लोगों” ने INDIA गठबंधन के साथ मार्च किया। मांग थी — नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा। अब्दुल्ला ने कहा, “हम इस लड़ाई में एक साथ खड़े हैं”। इससे पहले उन्होंने रविवार को दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की भी निंदा की थी।
दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तीखा पलटवार किया। मिज़ोरम के आइजोल में उन्होंने प्रदर्शन को “लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला” बताया। सिंधिया का आरोप है कि चुनावी हार के बाद कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। उन्होंने चुनाव आयोग, न्यायपालिका, CJI और सेना का नाम लिया। 1975-77 के आपातकाल का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस की संवैधानिकता की बात खोखली है। उनके शब्दों में, फैसले “सड़कों पर नहीं, जनता की अदालत में” होते हैं।
शिवसेना नेता शाइना एनसी ने भी प्रतिक्रिया दी। मुंबई में उन्होंने कहा कि SIR “वोट चोरी नहीं, सफाई की प्रक्रिया” है। उनका आरोप है कि MNS और शिवसेना (UBT) “फर्जी वोट बचाने” का अभियान चला रहे हैं। यह बयान आगामी BMC चुनावों के संदर्भ में आया है।
याचिका दाखिल होने के बाद बढ़ा सियासी तापमान
गौरतलब है कि सोमवार को ही INDIA गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मुद्दा है SIR और कथित “वोट चोरी”। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत 11 नेता याचिकाकर्ता हैं। सुबह से दोपहर तक चले मार्च के बाद शाम को आई ये प्रतिक्रियाएं अहम हैं। इनसे साफ है कि यह मुद्दा अब दिल्ली की सड़कों तक सीमित नहीं रहा। इसका सियासी दायरा राष्ट्रीय होता जा रहा है।
मार्च के दौरान दिल्ली के छह मेट्रो स्टेशनों के द्वार बंद रहे। कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहा। अब सबकी नजर मंगलवार की संभावित सुनवाई पर है। यह सुनवाई CJI सूर्यकांत की बेंच के सामने हो सकती है (Deccan Chronicle)।
