यूरोप में फ्रांस के बाद अब अल्बानिया सुलग रहा है। राजधानी तिराना में सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों का सोमवार को छठा दिन था। प्रधानमंत्री एडी रामा ने इस्तीफे की मांग साफ तौर पर ठुकरा दी है।
रविवार दोपहर सैकड़ों प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्रालय के सामने जमा हुए और ‘रामा, इस्तीफा दो’ के नारे लगाए। पुलिस ने भीड़ रोकने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस चलाई। इसके बाद प्रदर्शन शहर के केंद्र में फैल गए। घंटों तक हिंसक झड़पें चलीं।
थाने और मंत्रालय पर हमला
प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर कूड़ेदान जलाए। सत्तारूढ़ सोशलिस्ट पार्टी के मुख्यालय समेत कई इमारतों की खिड़कियां तोड़ दीं। एक पुलिस थाने और गृह मंत्रालय के प्रवेश द्वार को आग के हवाले कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर और पेट्रोल बम फेंके। पुलिस ने रबर की गोलियों और आंसू गैस से जवाब दिया।
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक झड़पों में 16 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें से 14 थाने पर हुए हमले में जख्मी हुए। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक रविवार को 28 लोग घायल हुए। इनमें 19 पुलिसकर्मी, 4 प्रदर्शनकारी, 4 राहगीर और एक पत्रकार शामिल हैं।
‘यह विरोध नहीं, हमला है’
पुलिस अधिकारी अल्बर्ट नुशी ने कहा कि थाने पर पेट्रोल बमों से हमला हुआ। इससे वहां मौजूद अधिकारी और हिरासत में रखे लोग खतरे में पड़ गए। उन्होंने कहा कि थाने पर हमला विरोध नहीं है और पुलिसकर्मियों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
इस्तीफे से इनकार, EU का हवाला
प्रधानमंत्री रामा ने वीडियो संदेश में प्रदर्शनों को ‘बाहरी हाथ’ की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि ये अल्बानिया के यूरोपीय संघ में शामिल होने के सपने के लिए खतरा हैं। 2013 से सत्ता में चल रहे रामा ने पिछले साल चौथा कार्यकाल जीता था।
क्यों भड़के हैं प्रदर्शन
13 अक्टूबर से शुरू हुए प्रदर्शनों की अगुवाई छात्र कर रहे हैं। उनकी मांगें हैं — विश्वविद्यालयों की खराब हालत में सुधार, ऊंची ट्यूशन फीस में कटौती और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई। शनिवार को सबसे भीषण हिंसा हुई थी। प्रदर्शनकारियों ने कारें और कूड़ेदान जलाकर बैरिकेड बनाए थे। तिराना में अमेरिका के दूतावास ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शन अब छठे दिन में प्रवेश कर चुके हैं।
