भोपाल के मिसरौद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार को बुधवार को सस्पेंड कर दिया गया। उन पर आरोप है कि उन्होंने मंगलवार को प्रदर्शन कर रहे आदिवासी छात्रों से अभद्र भाषा का प्रयोग किया। विवाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद कार्रवाई की मांग तेज हुई।
घटना मंगलवार की है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की छात्र शाखा ने आदिवासी छात्रों की समस्याओं को लेकर भोपाल में प्रदर्शन का आयोजन किया था। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने “जय जोहार” का नारा लगाया। जय जोहार आदिवासी समाज का पारंपरिक अभिवादन है।
वीडियो में थाना प्रभारी कथित तौर पर इस नारे पर आपत्ति जताते दिख रहे हैं। वीडियो के अनुसार उन्होंने छात्रों से अभद्र भाषा का प्रयोग किया और कथित तौर पर मारपीट की धमकी भी दी। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप
मामला मुख्यमंत्री Mohan Yadav के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद भोपाल पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने परिहार को निलंबित किया और विभागीय जांच के आदेश दिए। जांच में घटना के तथ्यों और सभी पक्षों की भूमिका की पड़ताल होगी।
प्रदेश के मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासी समुदाय के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। जांच के नतीजे के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कार्रवाई होगी।
विपक्ष और संगठनों की प्रतिक्रिया
वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस और कई आदिवासी संगठनों ने थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि “जोहार” गाली नहीं है, बल्कि आदिवासी संस्कृति, पहचान और स्वाभिमान का प्रतीक है।
सिंघार ने थाना प्रभारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और FIR दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों से नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और संविधान की गरिमा बनाए रखने की उम्मीद होती है, न कि लोगों को अपमानित करने की।
