दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार शाम को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में ले लिया। कार्रवाई ठीक उस समय हुई जब दीपके निर्धारित ‘लेहरा दो तिरंगा’ मार्च के लिए अपने ठिकाने से निकल रहे थे। इस घटना के बाद शाम 5 बजे का तिरंगा मार्च पुलिस कार्रवाई में उलझकर रह गया।
घर से निकलते ही हिरासत, समर्थकों ने गाड़ी रोकी
सूत्रों के मुताबिक, दीपके एनसीपी (एससीपी) प्रवक्ता अनीश गावंडे के रानी झांसी रोड स्थित आवास से निकले ही थे कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया। एक अधिकारी को यह कहते हुए सुना गया — “We are placing you under preventive detention. Section 163 is in force in Connaught Place. You are being detained…” यानी BNSS की धारा 163 के तहत निवारक हिरासत में लिया जा रहा है।
दीपके ने पुलिस से पूछा, “मैंने अभी कोई कानून नहीं तोड़ा है… आप मुझे कैसे हिरासत में ले सकते हैं?” इसके बाद पुलिस उन्हें गाड़ी में बैठाकर ले गई। घटना के समय मौजूद CJP समर्थकों ने पुलिस के वाहन को रोकने की कोशिश की। पुलिस की ओर से हिरासत पर तत्काल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई।
मंडी हाउस पर नेहा बोरा समेत प्रदर्शनकारी रोके गए
वहीं दूसरी ओर, मंडी हाउस चौराहे पर तिरंगा लेकर कनॉट प्लेस की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इनमें AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल थीं।
इससे पहले शुक्रवार दोपहर को 20 से अधिक पुलिसकर्मी दीपके के ठिकाने पहुंचे थे और उन्हें दोपहर में दीपके को नोटिस तामील किया गया था — एक नोटिस नई दिल्ली जिला प्रशासन की ओर से दिल्ली पुलिस अधिनियम के तहत था, जिसमें सेंट्रल पार्क न आने का निर्देश था, और दूसरा साउथ-वेस्ट दिल्ली प्रशासन की ओर से, जिसमें हवाई अड्डे पर हुई निवारक हिरासत के बाद अदालत के एक साल के “बाउंड डाउन” आदेश की याद दिलाई गई थी।
दिल्ली पुलिस ने तीन शहरों में तिरंगा मार्च के लिए बुलाई गई इस सभा को अनुमति नहीं दी थी। पुलिस का कहना है कि कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है, जहां बड़े जमावड़े पर रोक है। NDMC ने भी प्रशासनिक कारणों से सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को बंद रखने का आदेश दिया था। पुलिस ने प्रस्ताव रखा था कि चुनिंदा लोगों का छोटा समूह वैकल्पिक स्थान पर ध्वज फहरा सकता है।
पृष्ठभूमि में बता दें कि यह मार्च CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका के समर्थन में बुलाया गया था। दोनों को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में प्रवेश कर झंडा फहराने के आरोप में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था — तब जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया था। मुंबई में आजाद मैदान पर मार्च की अनुमति मिल गई थी, जबकि बेंगलुरु में टाउन हॉल पर अनुमति से इनकार कर दिया गया था।
सूत्र: CNN
