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Container Manufacturing Scheme: ₹10,000 करोड़ की मंजूरी

Dainik R Times
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Container Manufacturing Scheme को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। इस योजना का कुल बजट ₹10,000 करोड़ रखा गया है। योजना का नाम Container Manufacturing Promotion Scheme है। इसका मकसद भारत में कंटेनर बनाने की क्षमता को बढ़ाना है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में यह फैसला हुआ।

सूचना और प्रसारण मंत्री Ashwini Vaishnaw ने बैठक के बाद जानकारी दी। उन्होंने कहा कि योजना से नई फैक्ट्रियां लगेंगी। पुरानी इकाइयों का विस्तार भी होगा। इसलिए भारत आयात पर निर्भरता कम कर सकेगा। योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में हुई थी।

यह योजना वित्त वर्ष 2027-28 से वित्त वर्ष 2039-40 तक चलेगी। इसमें तीन साल फैक्ट्री लगाने के लिए होंगे। इसके बाद दस साल तक उत्पादन को मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि इससे आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी। इसलिए यह योजना Make in India के लिए भी अहम है।

Container Manufacturing Scheme से उत्पादन दस गुना होगा

भारत में अभी सालाना करीब 70,000 TEUs कंटेनर बनते हैं। TEU का मतलब Twenty-foot Equivalent Unit है। यह कंटेनर की क्षमता नापने की मानक इकाई है। योजना का लक्ष्य उत्पादन को 7.5 लाख TEUs तक ले जाना है। यानी उत्पादन करीब दस गुना बढ़ेगा।

योजना का सबसे बड़ा हिस्सा उत्पादन मदद के लिए है। इसके लिए ₹8,891 करोड़ रखे गए हैं। वैश्विक मानकों पर बने कंटेनर बेचने पर मदद मिलेगी। साथ ही, घरेलू सामग्री की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत करनी होगी। इसलिए स्थानीय उद्योगों को भी फायदा होगा।

ब्याज मदद के लिए ₹859 करोड़ रखे गए हैं। इसके तहत योग्य कर्ज पर सालाना 3 प्रतिशत ब्याज मदद मिलेगी। नई फैक्ट्री के लिए कम से कम 1 लाख TEUs सालाना क्षमता जरूरी होगी। पुरानी इकाई के विस्तार के लिए कम से कम 25,000 TEUs सालाना क्षमता जरूरी होगी। परीक्षण और प्रमाणन के लिए ₹150 करोड़ रखे गए हैं। इसके अलावा, जमीन लीज मदद भी योजना का हिस्सा है।

50,000 से ज्यादा अप्रत्यक्ष नौकरियां बनेंगी

सरकार का अनुमान है कि योजना से 3,000 सीधी नौकरियां बनेंगी। इसके साथ 50,000 से ज्यादा अप्रत्यक्ष नौकरियां भी बनेंगी। सहायक उद्योगों में भी काम बढ़ेगा। इनमें कॉर्नर कास्टिंग, विशेष इस्पात, लकड़ी के फ्रेम और पेंट शामिल हैं। इसलिए छोटे और मझोले उद्योगों को भी मौका मिलेगा।

भारत का लक्ष्य 2047 तक दुनिया की शीर्ष पांच समुद्री शक्तियों में शामिल होना है। कंटेनर ढुलाई 2024 में 2.4 करोड़ TEUs थी। इसे 2047 तक 17.5 करोड़ TEUs तक ले जाने का लक्ष्य है। इसलिए घरेलू उत्पादन बढ़ाना जरूरी बताया गया है। हालांकि, यह लक्ष्य तभी पूरा होगा जब फैक्ट्रियां समय पर लगें।

उसी मंत्रिमंडल बैठक में कर्मचारियों का महंगाई भत्ता भी बढ़ाया गया था। इसके अलावा, खेल सामान बनाने और ग्रामीण शासन की योजनाओं को भी मंजूरी मिली। इसलिए यह बैठक अर्थव्यवस्था और उद्योग के लिहाज से अहम मानी जा रही है।

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