मध्य प्रदेश में सफाईकर्मी बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। यह MP Safai Karmi Strike भोपाल समेत प्रदेशभर के नगरीय निकायों में शुरू हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक न कचरा उठेगा और न सफाई होगी। दीपावली से ठीक पहले शुरू हुए इस आंदोलन से नगर निगमों की चिंता बढ़ गई है। भोपाल नगर निगम में करीब 14 हजार सफाईकर्मी काम करते हैं।
MP Safai Karmi Strike: 25 हजार वेतन और नियमितीकरण की मांग
सफाईकर्मियों की मुख्य मांग मासिक वेतन बढ़ाकर 25 हजार रुपये करना है। वे वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने की भी मांग कर रहे हैं। ठेका प्रथा खत्म करने और 29 दिन के दैनिक वेतन भोगियों को नियमित करने की मांग भी शामिल है। कुल आठ मांगों को लेकर यह आंदोलन चल रहा है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से मांगें उठाई जा रही हैं। हालांकि शासन स्तर पर कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
मंगलवार को प्रदर्शन, फिर चक्काजाम
मंगलवार को अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के बैनर तले 57 जिलों के सफाईकर्मियों ने भोपाल में प्रदर्शन किया था। सुबह 9 बजे से हजारों कर्मचारी शाहजहानी पार्क में जमा हुए। ज्ञापन लेने कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। इसके बाद कर्मचारियों ने जहांगीराबाद चौराहे पर करीब दो घंटे तक चक्काजाम किया। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट ने इसे सरकार को दिया गया अंतिम ज्ञापन बताया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि फैसला नहीं हुआ तो 4 नवंबर से हड़ताल शुरू होगी।
दीवाली की सफाई पर संकट, आज होगी बैठक
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर दीवाली की सफाई पर पड़ सकता है। नगर निगम ने 4 नवंबर से पूरे शहर में विशेष सफाई अभियान शुरू करने की तैयारी की थी। शाम 4 से रात 8 बजे तक फागिंग का कार्यक्रम भी तय था। अब हड़ताल लंबी चली तो भोपाल के 85 वार्डों की सफाई व्यवस्था बेपटरी हो सकती है। न्यू मार्केट में पहले से ही गंदगी का अंबार लगने लगा है। बुधवार को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रमुख सचिव मनोज दुबे से यूनियन की मुलाकात प्रस्तावित है। यूनियन का कहना है कि सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन अनिश्चितकाल तक चलेगा।
प्रदेश के 10 संभागों, 16 नगर निगमों और 374 नगरपालिकाओं के कर्मचारी इस आंदोलन से जुड़े हैं। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन पर भी इसका असर दिखने लगा है। प्रशासन अब वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रहा है। हालांकि यूनियन ने साफ कहा है कि आश्वासन से काम नहीं चलेगा। कर्मचारियों को ठोस फैसला चाहिए। मुख्यमंत्री ने हाल ही में किसानों को 10 घंटे बिजली का आश्वासन दिया था।
