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Bhagirathpura Report: 2018 से पता था, फिर भी लापरवाही

Dainik R Times
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इंदौर के Bhagirathpura Report पर गुरुवार को हाई कोर्ट में अंतिम बहस नहीं हो सकी। नईदुनिया की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट का समय खत्म होने के कारण सुनवाई टल गई। अब कोर्ट 17 नवंबर को अंतिम बहस सुनेगी। इस मामले में 600 से ज्यादा पन्नों की जांच रिपोर्ट है। यह रिपोर्ट पहले ही हाई कोर्ट की वेबसाइट पर डाली जा चुकी है। रिपोर्ट में प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है।

Bhagirathpura Report में क्या निकला

जांच आयोग ने कहा कि अधिकारियों को 2018 से ही सच पता था। शहर के एक बड़े हिस्से में दूषित पानी सप्लाई हो रहा था। इसके बावजूद कोई असरदार सुधार नहीं किया गया। आयोग ने माना कि पेयजल और ड्रेनेज की लाइनें एक साथ बिछाने से पानी दूषित हुआ। पानी के नमूनों में ई-कोलाई और कोलिफॉर्म बैक्टीरिया मिले थे। आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत्त जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता ने की थी। आयोग ने अपनी रिपोर्ट के आखिरी 112 पन्नों में निष्कर्षों का सार दिया है।

22 मौतों की पुष्टि, मुआवजे की सिफारिश

दिसंबर-जनवरी में भागीरथपुरा में दूषित पानी से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े थे। स्थानीय लोगों और कांग्रेस का दावा है कि 36 लोगों की जान गई थी। स्वास्थ्य विभाग को 12 फरवरी तक 35 मौतों की जानकारी मिली थी। आयोग ने इनमें से 22 मौतों का दूषित पानी से सीधा संबंध पाया। बाकी मौतों का कारण स्पष्ट नहीं लिखा गया है। आयोग ने हर मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा देने की सिफारिश की है। गंभीर रूप से बीमार लोगों को 2 से 3 लाख रुपये देने की सिफारिश भी की गई है।

जिम्मेदारी किसकी, आगे क्या

आयोग ने कहा कि यह हादसा रोका जा सकता था। उसने नगर निगम को सबसे ज्यादा जिम्मेदार ठहराया है। एक सहायक अभियंता सरोज कुमार प्रजापति की गंभीर लापरवाही भी सामने आई है। आयोग ने पेयजल और ड्रेनेज का काम निगम से लेकर अलग बोर्ड बनाने की सिफारिश की है। मामले में सात जनहित याचिकाएं चल रही हैं। अंतिम बहस के बाद ही कोर्ट तय करेगी कि किस पर क्या कार्रवाई होगी। शहरों में भोपाल में सफाई हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही थी। मौसम में धनतेरस-दिवाली पर साफ आसमान रहने की उम्मीद है।

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