देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश बने सूर्यकांत: शपथ के बाद माता-पिता के पैर छुए, पूर्व CJI गवई से गले मिले

DR Times
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देश के न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। समारोह में कई वरिष्ठ न्यायाधीश, केंद्रीय मंत्रियों, कानूनी संस्थानों के प्रमुखों और उनके परिवार के सदस्य मौजूद रहे।

शपथ ग्रहण के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने वो दृश्य प्रस्तुत किया जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया—उन्होंने आगे बढ़कर अपने माता-पिता के पैर छुए और उनका आशीर्वाद लिया। भारतीय परंपरा और संस्कारों से भरे इस भावुक पल ने पूरे समारोह को एक अलग ही गरिमा प्रदान की। सोशल मीडिया पर इस दृश्य का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, और लोग इसे भारतीय संस्कृति का “सच्चा सम्मान” बता रहे हैं।

यही नहीं, शपथ के बाद उन्होंने पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ और अभी हाल ही में पद छोड़े पूर्व CJI जस्टिस रमण गवई से गर्मजोशी से मुलाकात की। जस्टिस सूर्यकांत ने गवई को सार्वजनिक रूप से गले लगाकर उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया। यह दृश्य भी न्यायपालिका में टीमवर्क और सम्मान की भावना को दर्शाता है।

कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत?

जस्टिस सूर्यकांत का जन्म हरियाणा के हिसार ज़िले में एक साधारण परिवार में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल में हुई, जिसके बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई की और धीरे-धीरे न्यायपालिका में अपनी पहचान मजबूत की। वे हरियाणा हाईकोर्ट और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जज रह चुके हैं। इसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति मिली।

उनका करियर वंचितों, श्रमिकों और सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए जाना जाता है। वे अपने स्पष्ट और दृढ़ फैसलों के कारण न्यायपालिका में एक सशक्त आवाज माने जाते हैं।

14 महीने का कार्यकाल – क्यों महत्वपूर्ण?

जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल लगभग 14 महीने का होगा। हालांकि समय कम है, पर उनसे महत्वपूर्ण सुधारों और कई लंबित मामलों के निपटारे की उम्मीद की जा रही है।
उनके दायरे में आए महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे—

  • जनहित याचिकाओं में पारदर्शिता

  • जजों की नियुक्ति और कॉलेजियम प्रणाली की दक्षता

  • लंबित केसों की तेजी से सुनवाई

  • डिजिटल न्यायिक ढांचे को मजबूत करना

विशेषज्ञों का मानना है कि जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल न्यायपालिका में कई सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

परिवार के लिए गौरव का क्षण

शपथ ग्रहण के दौरान उनके माता-पिता की मौजूदगी और उनके प्रति जताए सम्मान ने पूरे देश में एक सकारात्मक संदेश दिया। यह पल न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि हर उस भारतीय के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिश्रम और ईमानदारी से आगे बढ़ने का सपना देखता है।

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