इंदौर मंडी शुल्क में आधा प्रतिशत वृद्धि, डेढ़ करोड़ से ज्यादा राजस्व
इंदौर की कृषि उपज मंडियों में Indore Mandi Shulk बढ़ाने का असर अब मंडी के राजस्व पर दिखाई देने लगा है। मंडी सचिव ओपी खेड़े के मुताबिक, इस साल आय का लक्ष्य पिछले साल की तुलना में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक रहा।
मंडी शुल्क में आधा प्रतिशत की वृद्धि को लेकर व्यापारी और कांग्रेस पार्टी विरोध कर चुके हैं। इसके बावजूद मंडी प्रशासन ने शुल्क वापस लेने से इनकार किया है।
Indore Mandi Shulk बढ़ने से मंडी की आय में इजाफा
वहीं, मंडी सचिव ओपी खेड़े ने बताया कि शुल्क में आधा प्रतिशत वृद्धि के बाद मंडी की आय में बढ़ोतरी हुई है। उनके मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस साल मंडी को डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ।
मंडी प्रशासन का कहना है कि बढ़े हुए राजस्व से मंडी में विकास कार्य किए जा सकेंगे। इसके लिए अतिरिक्त धन की जरूरत है, जो मंडी शुल्क के माध्यम से जुटाया जा रहा है।
इसके अलावा, इंदौर की कृषि उपज मंडियां मध्य प्रदेश में अधिक राजस्व देने वाली मंडियों में शामिल रही हैं। मंडी प्रशासन अब राजस्व बढ़ाने के साथ विकास कार्यों पर भी जोर दे रहा है।
Indore Mandi Shulk पर व्यापारी और कांग्रेस का विरोध
हालांकि, मंडी शुल्क में आधा प्रतिशत वृद्धि का व्यापारियों ने विरोध किया था। कांग्रेस पार्टी की ओर से भी इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया गया।
इसके बावजूद मंडी सचिव ने शुल्क वापस लेने से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि मंडी में विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त राजस्व जरूरी है।
इसी वजह से मंडी प्रशासन बढ़े हुए शुल्क को जारी रखने के पक्ष में है। प्रशासन के मुताबिक, शुल्क से मिलने वाली अतिरिक्त आय का इस्तेमाल मंडी के विकास में किया जाएगा।
मंडी में बदलाव के बाद राजस्व पर जोर
इसके बाद मंडी बोर्ड ने ओपी खेड़े को मंडी सचिव की जिम्मेदारी दी। उनके कार्यभार संभालने के बाद तीनों मंडियों में कई बदलाव किए जाने की बात सामने आई है।
मंडी प्रशासन का मुख्य जोर अब राजस्व बढ़ाने और उपलब्ध संसाधनों से विकास कार्य कराने पर है। शुल्क वृद्धि इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताई जा रही है।
वहीं, शुल्क वृद्धि को लेकर व्यापारियों की आपत्ति भी बनी हुई है। ऐसे में आने वाले समय में मंडी प्रशासन और व्यापारियों के बीच यह मुद्दा चर्चा में रह सकता है।

