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Kuno में चीता आशा के शावक की मौत, भारत में 59 चीते बचे

Dainik R Times
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मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से दुखद खबर आई है। नामीबिया से लाई गई मादा चीता आशा के आठ महीने के शावक की सोमवार को मौत हो गई। इसके बाद भारत में चीतों की कुल संख्या घटकर 59 रह गई है।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सोमवार सुबह नियमित निगरानी के दौरान आशा अपने पांच शावकों में से सिर्फ चार के साथ दिखी। इसके बाद वनकर्मियों ने लापता शावक की तलाश शुरू की। लंबी खोजबीन के बाद शावक मृत अवस्था में मिला।

चीता परियोजना के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बयान में कहा कि सुबह की निगरानी में आशा चार शावकों के साथ देखी गई थी। उन्होंने बताया कि मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की जानकारी मिलेगी।

आशा ने करीब आठ महीने पहले पांच शावकों को जन्म दिया था। यह चीता परियोजना के लिए बड़ी उपलब्धि मानी गई थी। शावक की मौत के बाद कूनो में अब 53 चीते रह गए हैं, जिनमें 40 भारत में जन्मे हैं। इनमें से 15 खुले जंगल में घूम रहे हैं।

इसके अलावा गांधी सागर अभयारण्य में चार और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीते हैं। इस तरह देशभर में चीतों की संख्या अब 59 है।

चीता परियोजना की चुनौतियां

भारत में चीता को 1952 में विलुप्त घोषित किया गया था। सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीते लाकर कूनो में बसाए गए थे। इसके छह महीने बाद दक्षिण अफ्रीका से बारह और चीते लाए गए।

इस साल फरवरी में बोत्सवाना से भी नौ चीते कूनो लाए गए थे। परियोजना का मकसद भारत में चीतों की स्थायी आबादी तैयार करना है। हालांकि शावकों और वयस्क चीतों की मौतें इस परियोजना की चुनौतियों को भी उजागर करती रही हैं।

वन विभाग का कहना है कि आवास प्रबंधन, शिकार की उपलब्धता और पशु चिकित्सा देखभाल पर लगातार काम हो रहा है। शावक की मौत के कारणों की जांच के लिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

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