Middle East Crisis: Doodh-Kirana-Ilaj Mahanga, LPG Crisis Se Factory Band

Dainik R Times
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Middle East Crisis

Middle East Crisis: Gharon Tak Pahuncha Jang Ka Asar, Rozmarra Ka Samaan Hoga Mahanga

 

Middle East Crisis का असर अब आम लोगों की रसोई, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों तक पहुंचने लगा है। Middle East Crisis के कारण कच्चे तेल, गैस, प्लास्टिक और अन्य कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो रही है।

इसका सीधा असर दूध, किराना, पैकेजिंग, बोतलबंद पानी, दवा, एसी, फ्रिज और मेडिकल सामान की कीमतों पर पड़ सकता है। कंपनियां बढ़ती लागत के कारण अप्रैल से दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं।

Middle East Crisis से प्लास्टिक इंडस्ट्री पर सबसे बड़ा असर

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद प्लास्टिक उद्योग पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ा है। एलडीपीई, पीपी, पीवीसी और अन्य प्लास्टिक कच्चे माल के दाम तेजी से बढ़े हैं।

पिछले कुछ हफ्तों में एलडीपीई की कीमत 140 रुपए प्रति किलो से बढ़कर करीब 200 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। पॉलीमर और अन्य रॉ मटेरियल में 25 हजार से 35 हजार रुपए प्रति टन तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके कारण बाल्टी, बोतल, कंटेनर, पैकेजिंग और टंकी जैसे प्लास्टिक उत्पाद महंगे हो सकते हैं।

  • प्लास्टिक कच्चे माल के दाम 50-70% तक बढ़े
  • एलडीपीई की कीमत 140 से 200 रुपए प्रति किलो पहुंची
  • प्लास्टिक टंकी और कंटेनर 30-40% महंगे हो सकते हैं

इसका असर FMCG, पैकेजिंग और मेडिकल उत्पादों तक देखने को मिल सकता है।

कॉमर्शियल LPG संकट से हजारों यूनिट बंद

Middle East Crisis के कारण भारत में कॉमर्शियल LPG की कमी भी बढ़ गई है। इसका असर प्लास्टिक, स्टील, टेक्सटाइल और छोटे उद्योगों पर पड़ा है।

देशभर में हजारों छोटे उद्योग उत्पादन घटाने या बंद करने को मजबूर हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 20 हजार तक यूनिट्स प्रभावित हुई हैं। कई फैक्ट्रियों ने पुराने ऑर्डर भी रोक दिए हैं। हालांकि, सरकार ने कॉमर्शियल LPG की उपलब्धता 70% तक बढ़ाने की बात कही है ताकि उद्योगों को राहत मिल सके।

  • कॉमर्शियल LPG की कमी से उत्पादन प्रभावित
  • करीब 20 हजार छोटे उद्योग बंद होने की आशंका
  • सरकार ने 70% तक LPG उपलब्धता बढ़ाई

फिलहाल, सबसे ज्यादा असर प्लास्टिक, टेक्सटाइल और छोटे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर दिख रहा है।

रेडी टू ईट प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ी

LPG संकट के कारण शहरी घरों में खाना पकाने का तरीका भी बदल रहा है। कई परिवार अब कम गैस में बनने वाले या बिना पकाने वाले विकल्प चुन रहे हैं।

इसी वजह से इंस्टेंट नूडल्स, रेडी टू ईट मील, पैकेज्ड फूड, जूस और स्नैक्स की मांग तेजी से बढ़ी है। Amazon और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर रेडी टू ईट प्रोडक्ट्स की बिक्री में 15% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुछ शहरों में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री भी 10 गुना तक बढ़ी है।

  • रेडी टू ईट फूड की मांग 15% से ज्यादा बढ़ी
  • इंस्टेंट नूडल्स और पैकेज्ड फूड की बिक्री बढ़ी
  • इंडक्शन कुकटॉप की मांग 10 गुना तक बढ़ी

यह बदलाव दिखाता है कि LPG संकट अब लोगों की लाइफस्टाइल को भी प्रभावित कर रहा है।

सीमेंट, इलाज और मेडिकल सामान भी होंगे महंगे

Middle East Crisis का असर सीमेंट और हेल्थकेयर सेक्टर पर भी दिख रहा है। पेटकोक, कोयला, पैकेजिंग और कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से सीमेंट कंपनियों की लागत 150 से 200 रुपए प्रति टन तक बढ़ सकती है।

कई कंपनियां अप्रैल में दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। दूसरी ओर, फार्मा सेक्टर में दवाओं, पैकेजिंग और मेडिकल उपकरणों के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ी हैं। कुछ दवाओं के कच्चे माल में 50% से 90% तक की तेजी देखी गई है।

  • सीमेंट की लागत 150-200 रुपए प्रति टन बढ़ सकती है
  • दवाओं के कच्चे माल में 50-90% तक तेजी
  • मेडिकल और पैकेजिंग लागत बढ़ने की आशंका
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