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MP Tribal Protest: Chouhan-Yadav सुलह के बाद मार्च खत्म

Dainik R Times
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भोपाल। मध्यप्रदेश में सीहोर के कोसमी गांव से शुरू हुआ आदिवासी आंदोलन गुरुवार देर रात सुलह के बाद खत्म हो गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच CM हाउस में हुई देर रात की बैठक के बाद बुधनी से भोपाल की ओर बढ़ रहा हजारों आदिवासियों का मार्च बीच में ही वापस ले लिया गया।

डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की पहल पर हुई इस बैठक में गतिरोध टूटा। बैठक में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और वन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह भी मौजूद थे। चौहान के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।

MP tribal protest पर CM का रुख: ‘कानून अपना काम करेगा’, अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई से इनकार

रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री ने बैठक में अपना रुख साफ रखा कि मामले में “कानून अपना काम करेगा”। उन्होंने चौहान की दो प्रमुख मांगों — प्रभावित आदिवासियों को उसी जमीन पर बसाने और वन अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई — को नहीं माना। मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच के बाद ही उचित कार्रवाई होगी। हालांकि फ्री प्रेस जर्नल के मुताबिक वन विकास निगम ने फिलहाल अपना अतिक्रमण-विरोधी अभियान रोक दिया है और सरकार मार्च कर रहे आदिवासियों से भोपाल पहुंचने से पहले बातचीत की तैयारी कर रही है।

बैठक में वन विभाग ने गूगल इमेजरी समेत सबूत पेश किए कि आदिवासियों ने वन भूमि पर अतिक्रमण किया था। विभाग का दावा है कि परिवारों ने सागौन के पौधे उखाड़कर खेती शुरू की थी और जिन 12 परिवारों के घर तोड़े गए, उनके सिंहपुर में पक्के मकान भी हैं। विभाग का कहना है कि बार-बार चेतावनी के बाद कार्रवाई की गई थी, और चौहान के फोन करने के बाद अभियान रोका गया था।

5 दिन के धरने के बाद भोपाल मार्च, 17 अक्टूबर का प्रदर्शन अब टला

बता दें कि 11 अक्टूबर को कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने के बाद 5 दिन तक धरना चला था। समाधान न निकलने पर गुरुवार को हजारों आदिवासी भोपाल की ओर कूच कर गए थे। 17 अक्टूबर को भोपाल में बड़े प्रदर्शन की योजना थी, जो अब सुलह के बाद टल गई है। चौहान ने बैठक में कहा था कि कार्रवाई से पहले स्थानीय विधायक को विश्वास में लेना चाहिए था, क्योंकि इससे आदिवासी समुदाय में सरकार और बीजेपी को लेकर गलत संदेश गया। इस आंदोलन की शुरुआत और मार्च पर Dainik Rajeev Times पहले भी रिपोर्ट कर चुका है।

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